शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

गौतमबुद्धनगर में श्रम विभाग का बड़ा एक्शन: 203 संविदाकारों पर कार्रवाई, 1.16 करोड़ की पेनल्टी और ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी!!

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गौतमबुद्धनगर में श्रम विभाग का बड़ा एक्शन: 203 संविदाकारों पर कार्रवाई, 1.16 करोड़ की पेनल्टी और ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//गौतमबुद्धनगर, 17 अप्रैल 2026।
जनपद में श्रमिकों के हितों की अनदेखी करने वाले संविदाकारों के खिलाफ श्रम विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामलों में 24 कारखानों से जुड़े 203 संविदाकारों के लाइसेंस निरस्त करने, उनसे धनराशि की वसूली करने और संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि हालिया श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ में कुछ संविदाकारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कई संविदाकारों ने श्रम कानूनों का पालन नहीं किया और श्रमिकों को उनके वैधानिक हितलाभों से वंचित रखा।

इसी के तहत विभाग ने 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार 67 रुपये की पेनल्टी निर्धारित करते हुए संबंधित संविदाकारों को नोटिस जारी किया है, ताकि यह राशि श्रमिकों को भुगतान की जा सके।

वेतन वृद्धि पर भी बड़ा फैसला

श्रमिक असंतोष और वेतन वृद्धि की मांग को देखते हुए शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश पर गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू कर दी गई हैं, जिनका भुगतान मई 2026 की 7 से 10 तारीख के बीच किया जाएगा।

श्रमिकों के अधिकारों पर सख्ती

अपर श्रमायुक्त ने स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई वेतन दरें संविदा और स्थायी दोनों श्रमिकों पर समान रूप से लागू होंगी। श्रमिकों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की ही कटौती मान्य होगी। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की कटौती पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से, साथ ही बोनस और ग्रेच्युटी का लाभ भी अनिवार्य रूप से दिया जाएगा।

भुगतान में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

यदि कोई संविदाकार समय पर वेतन भुगतान नहीं करता या कम भुगतान करता है, तो उसके खिलाफ वसूली की कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्टिंग की जाएगी। इतना ही नहीं, संबंधित प्रधान सेवायोजक को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

श्रम विभाग ने साफ किया है कि श्रमिकों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए न्यायालय में अभियोजन भी दायर किया जाएगा।।