गौतमबुद्धनगर: फर्जी ECHS कार्ड से इलाज कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 4 गिरफ्तार — मौत के बाद भी जारी रहा धोखाधड़ी का खेल!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
ग्रेटर नोएडा | 17 मार्च 2026
दो टूक// कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए थाना बिसरख क्षेत्र में ECHS कार्ड का दुरुपयोग कर इलाज कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाखों रुपये का अवैध लाभ उठा रहे थे।
कैसे हुआ खुलासा
पुलिस को मिली गोपनीय सूचना और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर 17 मार्च को कार्रवाई करते हुए इस गिरोह को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वादी की जीवित पुत्री के नाम पर फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक अन्य महिला का इलाज कराया।
मौत के बाद भी जारी रहा फर्जीवाड़ा
चौंकाने वाली बात यह है कि इलाज के दौरान महिला (तनु) की मृत्यु हो जाने के बाद भी आरोपियों ने उसी फर्जी नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर अस्पताल में प्रस्तुत कर दिया। इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए करीब ₹6.5 लाख रुपये का अवैध लाभ उठाया गया।
कौन हैं आरोपी
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में शामिल हैं—
- शिखा सिंह (25 वर्ष)
- यश सिंह (20 वर्ष)
- जितेंद्र यादव (31 वर्ष)
- दानिश खान (22 वर्ष)
सभी आरोपी अलग-अलग जिलों के निवासी हैं और शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद संगठित तरीके से धोखाधड़ी में शामिल पाए गए।
ऐसे चलता था पूरा रैकेट
पूछताछ में सामने आया कि दानिश खान और उसका साथी प्रदीप पिछले करीब 2 वर्षों से इस तरह के फर्जीवाड़े में सक्रिय थे। ये लोग आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को टारगेट करते थे और उन्हें कम खर्च में इलाज कराने का झांसा देकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराते थे।
इस काम के बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। इस मामले में भी करीब ₹65,000 ऑनलाइन और बाकी नकद लिया गया।
क्या-क्या हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
- घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन
- व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए फर्जी ECHS कार्ड
- आधार कार्ड
बरामद किए हैं।
पहले भी जा चुके हैं जेल
मुख्य आरोपी दानिश खान पहले भी इसी तरह के मामले में थाना फेस-2 नोएडा से जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने दोबारा इस अवैध काम को शुरू कर दिया।
फरार आरोपी की तलाश जारी
इस गिरोह का एक अन्य सदस्य प्रदीप अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर लगातार दबिश दे रही है।
निष्कर्ष:
यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही धोखाधड़ी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह संगठित गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों का सहारा लेकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।।
