मंगलवार, 24 मार्च 2026

मुजफ्फरनगर: सिसौली में गूंजा जैविक खेती का संदेश: पद्मश्री सुभाष पालेकर के प्रशिक्षण शिविर में जुटे हजारों किसान!!

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मुजफ्फरनगर: सिसौली में गूंजा जैविक खेती का संदेश: पद्मश्री सुभाष पालेकर के प्रशिक्षण शिविर में जुटे हजारों किसान!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//मुजफ्फरनगर (सिसौली), 24 मार्च। किसानों की राजधानी कहे जाने वाले सिसौली में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक भव्य कृषि प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में देश के प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ पद्मश्री सुभाष पालेकर ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व और उसके लाभों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

22 मार्च से प्रारंभ हुए इस प्रशिक्षण शिविर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित एनसीआर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों और कृषि कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह एवं राजवीर सिंह जादौन समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे, जिससे आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया।

शिविर में गौतम बुद्ध नगर से पहुंचे जिलाध्यक्ष अशोक भाटी की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से चर्चा का केंद्र रही। अशोक भाटी लंबे समय से किसानों के हितों के लिए संघर्षरत रहे हैं और क्षेत्र में किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने वाले प्रमुख नेताओं में उनकी पहचान है। उनके नेतृत्व में कई जनआंदोलनों और किसान हितैषी पहलों को मजबूती मिली है। सिसौली में आयोजित इस शिविर में भी उन्होंने किसानों को एकजुट होकर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि बदलते समय में खेती के तरीकों में सुधार बेहद जरूरी है।

वहीं, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सुभाष चौधरी ने इस आयोजन के महत्व को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मीडिया के माध्यम से किसानों की आवाज को सशक्त बनाने और जैविक खेती के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई। सुभाष चौधरी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि सही जानकारी और सकारात्मक पहल को देशभर के किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे आधुनिक और टिकाऊ खेती को अपना सकें।

एनसीआर अध्यक्ष परविंदर अवाना ने भी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खेती से धीरे-धीरे दूरी बनाकर जैविक विकल्पों को अपनाएं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

कार्यक्रम में उपस्थित रहे अजय गुर्जर भी क्षेत्र के सक्रिय एवं जागरूक युवा चेहरों में गिने जाते हैं, जो लगातार किसानों और सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए जाने जाते हैं। अजय गुर्जर ने हमेशा जमीनी स्तर पर किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान के लिए प्रयास किए हैं। सिसौली में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में उनकी भागीदारी ने यह संदेश दिया कि युवा पीढ़ी भी अब खेती और किसान हितों के प्रति गंभीर है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें।

पद्मश्री सुभाष पालेकर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में किसानों की स्थिति चिंताजनक है और इससे उबरने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने किसानों को शून्य बजट प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाने की सलाह दी।

इस प्रशिक्षण शिविर में सुंदर बाबा, रविंद्र भगत, प्रमोद टाइगर, धीरज चौधरी, पवन चौरौली, नरेश शर्मा, लकी पांडे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

शिविर के माध्यम से किसानों को जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक खेती अपनाने से जहां एक ओर उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आएगी। साथ ही, इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल मिलाकर सिसौली में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर किसानों के लिए एक नई उम्मीद और दिशा लेकर आया है, जो भविष्य में खेती के स्वरूप को सकारात्मक रूप से बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।।