बुधवार, 11 मार्च 2026

गौतमबुद्धनगर: लिगामेंट चोट के कारण, लक्षण और बचाव पर डॉ. अभिषेक गर्ग की कार्यशाला, सही वार्म-अप और फिजियोथेरेपी को बताया जरूरी!!

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गौतमबुद्धनगर: लिगामेंट चोट के कारण, लक्षण और बचाव पर डॉ. अभिषेक गर्ग की कार्यशाला, सही वार्म-अप और फिजियोथेरेपी को बताया जरूरी!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// नोएडा।
गौड़ सिटी-2 निवासी स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अभिषेक गर्ग ने एक जागरूकता कार्यशाला के दौरान लिगामेंट चोट के कारणों, उसके लक्षणों और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली और फिटनेस की कमी के कारण अब लिगामेंट इंजरी केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बच्चे और महिलाएं भी इसका शिकार हो रहे हैं।

डॉ. अभिषेक गर्ग ने बताया कि लिगामेंट मजबूत रेशेदार ऊतकों से बनी पट्टियां होती हैं, जो एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ती हैं और जोड़ों को स्थिरता प्रदान करती हैं। यह शरीर के जोड़ों को अत्यधिक हिलने-डुलने से बचाती हैं और उनकी सही गतिसीमा बनाए रखती हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेजन प्रोटीन लिगामेंट को मजबूती देता है, जबकि इलास्टिन फाइबर उसे लचीलापन प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि लिगामेंट इंजरी के प्रमुख कारणों में अचानक गिरना या फिसलना, खेल गतिविधियों के दौरान अचानक दिशा बदलना, अत्यधिक परिश्रम, दुर्घटना या गलत तरीके से किए गए शारीरिक कार्य शामिल हैं। कई बार घर में चलते समय अचानक फिसलने या झटका लगने से भी जोड़ों को नुकसान पहुंचता है और लिगामेंट में चोट आ जाती है।

डॉ. गर्ग के अनुसार हल्की मोच या चोट सामान्यतः 1 से 2 सप्ताह में ठीक हो जाती है, जिसमें बर्फ से नियमित सिकाई करना लाभदायक होता है। वहीं मध्यम स्तर की चोट को ठीक होने में 3 से 6 सप्ताह तक का समय लग सकता है। अगर लिगामेंट पूरी तरह से फट जाता है तो उसे ठीक करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है और पूरी तरह ठीक होने में 6 महीने से 12 महीने तक का समय लग सकता है।

उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद शुरुआती 48 घंटे तक पूरा आराम करना चाहिए और प्रभावित पैर पर वजन नहीं डालना चाहिए। सूजन और दर्द को कम करने के लिए हर दो घंटे में करीब 20 मिनट तक बर्फ की सिकाई करनी चाहिए तथा लेटते समय पैर को तकिए के सहारे थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे फिजियोथेरेपी और चिकित्सकीय मार्गदर्शन में व्यायाम के जरिए सामान्य गतिविधियों की ओर लौटाया जाता है।

कार्यशाला में उन्होंने यह भी बताया कि नए ऊतक बनने और उन्हें मजबूत होने में समय लगता है, इसलिए फिजियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग और हल्के-फुल्के व्यायाम डॉक्टर की देखरेख में ही करने चाहिए, जिससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।

गौरतलब है कि डॉ. अभिषेक गर्ग प्रो-कबड्डी लीग में पटना पाइरेट्स और गुजरात जायंट्स टीम के हेड फिजियोथेरेपिस्ट भी रह चुके हैं और कई स्पोर्ट्स टीमों के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं। कार्यशाला के दौरान उन्होंने लोगों से नियमित व्यायाम, सही वार्म-अप और फिटनेस पर ध्यान देने की अपील की, ताकि लिगामेंट से जुड़ी चोटों से बचा जा सके।।