सोमवार, 2 मार्च 2026

कलाकारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम: गाजियाबाद में तीन दिवसीय ‘एस्पायर’ कार्यशाला का सफल आयोजन!!

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कलाकारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम: गाजियाबाद में तीन दिवसीय ‘एस्पायर’ कार्यशाला का सफल आयोजन!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// गाजियाबाद। भारतीय प्रदर्शन कलाकारों को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जयपुरिया बिजनेस स्कूल गाजियाबाद ने कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान, दिल्ली के सहयोग से अपने परिसर में तीन दिवसीय कार्यशाला ‘एस्पायर’ का आयोजन किया।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कलाकारों को केवल कला तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवसाय विकास और प्रभावी संचार कौशल से सुसज्जित करना था। कार्यक्रम के माध्यम से कलाकारों को यह समझाया गया कि वे स्वयं को पेशेवर रूप से कैसे प्रस्तुत करें, सोशल मीडिया पर अपनी मजबूत पहचान कैसे बनाएं, प्रभावी बायोडाटा एवं पोर्टफोलियो कैसे तैयार करें और बदलते तकनीकी परिवेश में अपनी कला को कैसे टिकाऊ बनाएं।

कार्यक्रम का उद्घाटन जयपुरिया बिजनेस स्कूल के निदेशक तपन कुमार नायक और कला कल्प की निदेशक एवं प्रख्यात ओडिसी नृत्यांगना डॉ. अतासी मिश्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीन नितिन सक्सेना, सहायक प्रोफेसर डॉ. स्वधा भारतीय, कला कल्प के उपाध्यक्ष मोहित माधव तथा एसएम कंसल्टेंसी के निदेशक शमशेर उप्पल प्रमुख वक्ताओं के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आज के समय में शिक्षा और कौशल विकास का साथ-साथ चलना अत्यंत आवश्यक है। मोहित माधव ने दोनों संस्थानों के बीच इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉ. अतासी मिश्रा ने कहा कि उनका प्रयास हमेशा युवाओं को उन्नति के विविध मार्ग उपलब्ध कराना रहा है, ताकि पारंपरिक और लोक कलाकार भविष्य में मजबूत पहचान बना सकें। उन्होंने कलाकारों को संस्कृति मंत्रालय द्वारा उपलब्ध विभिन्न अवसरों और योजनाओं की जानकारी भी विस्तार से दी।

वहीं शमशेर उप्पल ने प्रदर्शन कलाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध छात्रवृत्ति सुविधाओं पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के समापन के साथ ही गाजियाबाद के जयपुरिया बिजनेस स्कूल और दिल्ली के कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान के बीच स्थापित यह सहयोग कलाकारों पर गहरी छाप छोड़ गया। इस पहल ने न केवल कलाकारों को उद्योग के लिए आवश्यक कौशल प्रदान किए, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक संदेश दिया।

कला कल्प की रचनात्मक विशेषज्ञता और जयपुरिया की अकादमिक दक्षता के संगम से यह पहल भविष्य में ऐसे कलाकार-उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक मंच पर भारत की पहचान को और मजबूत करेंगे।।