गुरुवार, 19 मार्च 2026

गौतमबुद्धनगर: नोएडा में ‘लापरवाही की आग’: बिजली मीटर फैक्ट्री हादसे में मजदूर की मौत, जांच में खुली सुरक्षा खामियों की परतें!!

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गौतमबुद्धनगर: नोएडा में ‘लापरवाही की आग’: बिजली मीटर फैक्ट्री हादसे में मजदूर की मौत, जांच में खुली सुरक्षा खामियों की परतें!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// नोएडा। सेक्टर-4 स्थित बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भीषण आग अब एक बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा लापरवाही के मामले के रूप में सामने आई है। 12 मार्च की सुबह करीब 5 बजे नाइट शिफ्ट के दौरान हुए इस हादसे में एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक कर्मचारी घायल हो गए थे। घटना के बाद मची अफरातफरी में कर्मचारियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, लेकिन इस हादसे ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन दिन बाद मिला शव, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

हादसे के बाद एक मजदूर लापता हो गया था, जिससे परिवार में चिंता और आक्रोश का माहौल था। लगातार सर्च ऑपरेशन के बावजूद उसका पता नहीं चल सका। करीब तीन दिन बाद फैक्ट्री के स्टोर रूम से उसका शव बरामद हुआ। इस घटनाक्रम ने परिजनों के गुस्से को और बढ़ा दिया। उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन किया जाता, तो मजदूर की जान बचाई जा सकती थी।

जांच में उजागर हुईं खतरनाक लापरवाहियां

प्रशासनिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फैक्ट्री में लंबे समय से जर्जर और पुरानी वायरिंग का उपयोग किया जा रहा था। साथ ही क्षमता से अधिक मशीनों का संचालन किया जा रहा था, जिससे बिजली पर अत्यधिक दबाव बन रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इसी वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ और आग ने विकराल रूप ले लिया।
सबसे गंभीर बात यह पाई गई कि फैक्ट्री के पास विद्युत सुरक्षा का कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं था, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी में भारी चूक

जांच टीम ने यह भी पाया कि फैक्ट्री परिसर में अवैध निर्माण कर उत्पादन किया जा रहा था। बेसमेंट से लेकर अतिरिक्त मंजिलों और छत तक काम चल रहा था। पर्याप्त जगह और आपातकालीन निकास न होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भी बाधाएं आईं।
फायर सेफ्टी के इंतजाम भी बेहद कमजोर थे और मौके पर कोई प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

प्रशासन सख्त, फैक्ट्री सील

सहायक निदेशक कारखाना राम बहादुर के अनुसार, फैक्ट्री में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को सील कर उत्पादन पर रोक लगा दी है। साथ ही प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा बनाम मुनाफा: बड़ा सवाल

यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मुनाफे की दौड़ के खतरनाक परिणामों को उजागर करता है। सवाल यह है कि यदि समय रहते नियमों का पालन किया जाता, तो क्या एक मजदूर की जान बचाई जा सकती थी?