बुधवार, 18 मार्च 2026

गौतमबुद्धनगर: मानसिक स्वास्थ्य पर एपीडा की पहल: नोएडा में कार्यशाला के जरिए कर्मचारियों को दी संतुलित जीवनशैली की सीख!!

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गौतमबुद्धनगर: मानसिक स्वास्थ्य पर एपीडा की पहल: नोएडा में कार्यशाला के जरिए कर्मचारियों को दी संतुलित जीवनशैली की सीख!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// नोएडा। तनावपूर्ण और भागदौड़ भरी जीवनशैली के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एपीडा के राजभाषा अनुभाग द्वारा बुधवार को महात्मा गांधी सम्मेलन कक्ष में एक महत्वपूर्ण हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य विषय “मानसिक स्वास्थ्य का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव” रहा, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के गहरे संबंधों से अवगत कराया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य कर्मचारियों को यह समझाना था कि मानसिक संतुलन बनाए रखना न केवल मन की शांति के लिए, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन से आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव और डॉ. सुष्मिता भाटी ने अपने अनुभव साझा किए।

विशेषज्ञों ने मानसिक संतुलन, तनाव प्रबंधन और हार्मोनल संतुलन जैसे अहम विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव कई गंभीर शारीरिक बीमारियों का कारण बन सकता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक व्याधियों के बीच गहरे अंतर्संबंधों को उदाहरणों और प्रस्तुति के माध्यम से स्पष्ट किया।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को तनाव कम करने के व्यावहारिक उपाय, नियमित दिनचर्या अपनाने और संतुलित जीवनशैली बनाए रखने के सुझाव भी दिए गए। विशेष रूप से महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य, कार्य-जीवन संतुलन और मानसिक दबाव से निपटने के तरीकों पर भी सार्थक चर्चा हुई।

इस आयोजन में मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, वहीं क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मचारी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान कर्मचारियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक समाधान दिया।

कार्यशाला को लेकर प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखा गया और सभी ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया। यह पहल न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि कार्यस्थल पर सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई।