लखनऊ :
जम्मू कश्मीर में शहीद हुआ जिले का लाल,फ्लाइट से बरुई लाया जा रहा पार्थिव शरीर।।
दो टूक : सुल्तानपुर जनपद के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के बरुई गांव के जवान भूपेंद्र कुमार सिंह ने जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में देश की सुरक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई है। वे भारतीय सेना के ऑर्डिनेंस विंग में तैनात थे और ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव लाया जा रहा है, जहां पूरा इलाका गमगीन है और श्रद्धांजलि देने के लिए लोग जुट रहे हैं।
शहीद भूपेंद्र कुमार सिंह के चचेरे भतीजे सत्यम सिंह ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर जम्मू से सुबह 10:15 बजे की फ्लाइट से लखनऊ पहुंचेगा, और वहां से सुल्तानपुर के बरुई लाया जाएगा। अभी शहादत के ठोस कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह सीमा पर देशसेवा के दौरान हुआ बलिदान है।
बरुई घाट पर उनके सम्मान में अंत्येष्टि की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गांववाले, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भावुक होकर उन्हें याद कर रहे हैं। शहीद की शहादत पर पूरा परिवार और क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है, साथ ही गहरे दुख में डूबा हुआ है।
गांव में पसरा मातम।
सुल्तानपुर जनपद के जयसिंहपुर
तहसील क्षेत्र के बरुई गांव निवासी सेना के जवान भूपेन्द्र कुमार सिंह की जम्मू-कश्मीर के अखनूर स्थित ऑर्डिनेंस डिपो में ड्यूटी के दौरान रविवार सुबह शहादत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही यह दुखद समाचार गांव पहुंचा, हर आंख नम हो गई और गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया।
परिवार के अनुसार भूपेंद्र कुमार सिंह शनिवार की रात रात्रि ड्यूटी पर गए थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। इसके बाद देर रात उनकी पत्नी को सेना के अधिकारियों द्वारा फोन कर बताया गया कि वे अस्पताल में भर्ती हैं और किसी ऑपरेशन की बात सामने आई है। रविवार सुबह लगभग 9 बजे जवान के शहीद होने की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
भूपेन्द्र कुमार सिंह के बड़े भाई रविन्द्र कुमार ऑर्डिनेंस डिपो में ही सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि छोटा भाई भी सेना में देश सेवा कर रहा है। शहीद का पूरा परिवार देश की रक्षा में समर्पित रहा है।
परिवार का सैन्य इतिहास भी गौरवपूर्ण रहा है। शहीद के पिता प्रसिद्ध नारायण सिंह भी सेना में सेवाएं दे चुके थे और 1996 में सेना से सेवा निवृत्त हुए, और अब इस दुनिया में नहीं हैं।
भूपेन्द्र कुमार सिंह 18 वर्ष की उम्र में 2003 में सेना में भर्ती हुए थे और 41 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए। उनकी शादी वर्ष 2009 में रूबी सिंह से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं—बेटी शिल्पा सिंह (14 वर्ष), जो कक्षा 10 की छात्रा है और बेटा शिवांश सिंह (8 वर्ष) कक्षा 3 में पढ़ाई कर रहा है दोनों बच्चे अखनूर स्थित आर्मी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं और पिता के साथ ही रहते थे।
शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव बरुई लाया जा रहा है, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव के लोग, जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासी शहीद को अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुटे हैं।
देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले इस वीर सपूत की शहादत पर क्षेत्र को गर्व है, लेकिन परिवार और गांव को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।सैनिक के शहीद होने की खबर पर जिले के आला अधिकारी गांव पहुंच गए।
