मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: माननीय जिला जज अतुल श्रीवास्तव ने किया राजकीय सम्प्रेक्षण गृहों व बालिका गृह का निरीक्षण!!

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गौतमबुद्धनगर: माननीय जिला जज अतुल श्रीवास्तव ने किया राजकीय सम्प्रेक्षण गृहों व बालिका गृह का निरीक्षण!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

किशोर-किशोरियों से सीधा संवाद, सुविधाओं व पुनर्वास कार्यक्रमों की ली जानकारी

गौतमबुद्धनगर | 03 फरवरी, 2026

दो टूक// माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देशों के अनुपालन में माननीय जनपद न्यायाधीश गौतमबुद्धनगर श्री अतुल श्रीवास्तव द्वारा मंगलवार को राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर, राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोरी तथा राजकीय बाल गृह (बालिका) का विस्तृत निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान सचिव पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर श्रीमती शिवानी त्यागी भी उपस्थित रहीं।

बालक-बालिकाओं से संवाद, मामलों की प्रगति पर की चर्चा

निरीक्षण के दौरान माननीय जिला जज ने सम्प्रेक्षण गृहों में रह रहे बालक एवं बालिकाओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने किशोर-किशोरियों से उनके लंबित मुकदमों की स्थिति, न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी तथा उन्हें मिल रही विधिक सहायता के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

इसके साथ ही माननीय जिला जज ने बालक-बालिकाओं को उपलब्ध कराई जा रही भोजन व्यवस्था, आवास, स्वच्छता एवं अन्य भौतिक सुविधाओं की भी गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

योग से लेकर कंप्यूटर कोर्स तक, पुनर्वास पर विशेष फोकस

सचिव पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिवानी त्यागी ने जानकारी दी कि राजकीय सम्प्रेक्षण गृहों में रह रहे किशोर एवं किशोरियों के सर्वांगीण विकास और पुनर्वास के लिए विभिन्न रचनात्मक व कौशल विकास गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

इनमें योग, डांस, सिलाई-बुनाई, कंप्यूटर कोर्स, इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स, मेडिटेशन, आर्ट एवं क्राफ्ट जैसी गतिविधियां प्रमुख हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किशोर-किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

बाल संरक्षण और सुधारात्मक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल

माननीय जिला जज ने निरीक्षण के दौरान सम्प्रेक्षण गृहों में चल रही व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उनके मानसिक-सामाजिक विकास और पुनर्वास की दिशा में ऐसे प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

निरीक्षण के माध्यम से बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी व संवेदनशील बनाने का संदेश भी दिया गया।।