गौतमबुद्धनगर: पैसे दोगे तभी शव छुएंगे’ — नोएडा सेक्टर-94 पोस्टमार्टम हाउस में मानवता शर्मसार, कफ़न से लेकर एम्बुलेंस तक का सौदा!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
नोएडा।
दो टूक//नोएडा थाना सेक्टर-126 क्षेत्र स्थित सेक्टर-94 पोस्टमार्टम हाउस से सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यहां मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां आरोप है कि कर्मचारियों ने पैसे न मिलने पर शव को हाथ तक नहीं लगाया।
आरोपों के मुताबिक कर्मचारियों ने साफ कह दिया—“कफ़न के तीन हज़ार दोगे तो पैक करेंगे, वरना खुद कर लो।” दुख और सदमे में डूबे परिजन मजबूरी में बगल के श्मशान से मात्र 150 रुपये में कफ़न खरीदकर लाए और अपने ही हाथों से शव को कफ़न में लपेटकर अंतिम यात्रा की तैयारी की।
बताया जा रहा है कि हालात इतने बदतर थे कि पोस्टमार्टम हाउस में स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके चलते शव को जमीन पर रखने की नौबत आ गई। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक था और जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया।
हैरानी की बात यह है कि सरकारी नियमों के तहत मृतकों के लिए कफ़न निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन आरोप है कि नोएडा के इस पोस्टमार्टम हाउस में कफ़न को भी “कमाई का साधन” बना लिया गया है। आरोप यह भी हैं कि यहां शव को ले जाने वाली एम्बुलेंस से लेकर कफ़न तक, हर चीज़ का सौदा खुलेआम किया जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है। वीडियो ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या गरीब और मजबूर परिवारों के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार अब व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है?
मामले ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अगर सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा होता, तो किसी परिवार को अपने मृतक के साथ इस तरह का अपमान और पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब मौत के बाद भी सम्मान पैसों से खरीदा जाए, तो इससे बड़ी प्रशासनिक विफलता और क्या हो सकती है।
अब देखना यह है कि वायरल वीडियो और जनआक्रोश के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों व अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी जांच और फाइलों में दबकर रह जाएगा।
