गौतमबुद्धनगर: नैनो उर्वरकों से बदलेगी खेती की तस्वीर, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर दिया गया जोर!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला में अधिकारियों-कर्मचारियों को किया गया प्रशिक्षित
गौतमबुद्धनगर | 04 फरवरी, 2026
दो टूक// कृषि क्षेत्र में नवाचार और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विभाग एवं इफको सहकारी उर्वरक प्रयोगकर्ता संस्था के संयुक्त तत्वावधान में नैनो उर्वरकों के उपयोग एवं उनके लाभों पर ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विकास भवन स्थित सभागार में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर श्री राजीव कुमार ने की।
कार्यशाला में जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता विवेका सिंह तथा वरिष्ठ प्राविधिक सहायक अम्बा प्रकाश शर्मा सहित कृषि विभाग के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में उप कृषि निदेशक राजीव कुमार ने जैविक खेती को समय की आवश्यकता बताते हुए रासायनिक उर्वरकों पर दी जा रही सरकारी सब्सिडी की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पूर्व में जहां एक एकड़ धान की खेती में एक बोरी यूरिया का प्रयोग होता था, वहीं वर्तमान में किसान दो बोरी यूरिया प्रति एकड़ का उपयोग कर रहे हैं। इससे मृदा की अम्लीयता बढ़ रही है और भूमि में कार्बनिक तत्वों की भारी कमी आ रही है, जो दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे ने पीएम प्रणाम योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी न केवल उर्वरकों की खपत को कम करते हैं, बल्कि फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
वरिष्ठ प्राविधिक सहायक अम्बा प्रकाश शर्मा ने सरकार द्वारा संचालित ‘धरती बचाओ अभियान’ के बारे में जानकारी देते हुए किसानों को समय-समय पर मिट्टी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित प्रयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।
कार्यशाला में इफको के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने नैनो उर्वरकों के प्रयोग की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। उन्होंने नैनो उर्वरकों के प्रयोग से लागत में कमी, पर्यावरण संरक्षण और फसल उत्पादन में वृद्धि जैसे लाभों को विस्तार से समझाया।
कार्यशाला के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूक कर उन्हें किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।।
