आम बजट से किसान निराश, एमएसपी गारंटी और किसान सम्मान निधि पर चुप्पी से बढ़ी चिंता: राकेश टिकैत
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
नोएडा// नई दिल्ली।
दो टूक:: आम बजट 2026 को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। उन्होंने कहा कि बजट से किसानों को बहुत उम्मीदें थीं, खासकर गांव और खेती-किसानी से जुड़े लोगों की नजरें सरकार पर टिकी हुई थीं, लेकिन बजट में किसानों के मूल मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने बजट में कर्ज और कुछ हिल स्टेट की फसलों की बात तो की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इससे आम किसानों को वास्तविक रूप से कितना लाभ मिलेगा। उन्होंने अखरोट और चंदन जैसी फसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन फसलों के किसानों को कितना फायदा होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
उन्होंने सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर गारंटी कानून पर बजट में कोई ठोस चर्चा नहीं की गई, जबकि देश का किसान लंबे समय से इसकी मांग कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने किसान सम्मान निधि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को उम्मीद थी कि सम्मान निधि की राशि बढ़ाकर ₹12,000 प्रति वर्ष की जाएगी, लेकिन इस दिशा में भी कोई घोषणा नहीं हुई।
राकेश टिकैत ने बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा,
“दिल्ली के कागजों में यह बजट अच्छा लग सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि इसका फायदा धरातल पर कितनी दूर तक पहुंचेगा। गांव का किसान आज भी वही का वही खड़ा है।”
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जाहिर की। बजट में प्राइवेट स्कूलों की बात किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकारी स्कूलों को कमजोर किया गया या बंद करने की दिशा में कदम बढ़े, तो इसका सीधा नुकसान गांव और गरीब तबके के बच्चों को होगा।
इसके अलावा उन्होंने पशुपालकों की समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि पशु आहार (फीड) को सस्ता किया जाना चाहिए, ताकि दूध और पशुपालन से जुड़े किसानों को राहत मिल सके।
अंत में राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को बजट को सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित न रखते हुए, किसानों की ज़मीनी समस्याओं को समझकर ठोस फैसले लेने चाहिए, तभी यह बजट वास्तव में किसान हितैषी कहा जा सकेगा।
