गौतमबुद्धनगर: नोएडा के उत्तराखंड पब्लिक स्कूल की 9वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द!!
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बड़ी कार्रवाई, इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जांच में मिली गंभीर अनियमितताएं; 1100 छात्र प्रभावित
दो टूक// नोएडा। सेक्टर-56 स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कक्षा 9वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द कर दी है। यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कराई गई जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया, जिसमें स्कूल प्रबंधन की ओर से शिक्षकों के वेतन भुगतान और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में क्या मिला?
सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई जांच में पाया गया कि स्कूल में शिक्षकों को नियमानुसार वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा, परिसर में आवश्यक सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं हो रहा था। इन खामियों को गंभीर मानते हुए CBSE ने 9वीं से 12वीं तक की मान्यता समाप्त करने का निर्णय लिया।
1100 छात्र-छात्राओं पर असर
इस निर्णय का सीधा असर करीब 1100 छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। हालांकि, बोर्ड ने सत्र 2025-26 के लिए 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे अपनी बोर्ड परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर दे सकेंगे, ताकि उनके शैक्षणिक भविष्य पर तत्काल प्रभाव न पड़े।
9वीं और 11वीं के छात्रों को शिफ्ट करने के निर्देश
CBSE ने निर्देश जारी किए हैं कि कक्षा 9वीं और 11वीं में अध्ययनरत छात्रों को अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में समायोजित किया जाए। इसके लिए संबंधित जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
बहाली की शर्तें भी स्पष्ट
CBSE ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में यदि स्कूल प्रबंधन सभी अनिवार्य मानकों—विशेषकर वेतन भुगतान, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य शैक्षणिक शर्तों—को पूर्ण रूप से लागू करता है, तभी मान्यता की बहाली पर विचार किया जाएगा।
अभिभावकों में चिंता
फैसले के बाद अभिभावकों में चिंता का माहौल है। कई अभिभावकों का कहना है कि अचानक हुए इस निर्णय से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। वहीं, प्रशासन का दावा है कि छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए समुचित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली और नियामकीय निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से अन्य स्कूलों के लिए भी सख्त संदेश गया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।।
