शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण पर फिर उठे सवाल: सेक्टर-150 डूबने कांड में SIT रिपोर्ट लंबित, जांच के दायरे में आए अधिकारी को मिला अतिरिक्त प्रभार!!

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गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण पर फिर उठे सवाल: सेक्टर-150 डूबने कांड में SIT रिपोर्ट लंबित, जांच के दायरे में आए अधिकारी को मिला अतिरिक्त प्रभार!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

नोएडा।
दो टूक// नोएडा प्राधिकरण एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सेक्टर-150 में युवराज मेहता की पानी में डूबने से हुई दर्दनाक मौत के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। घटना को लेकर परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन जांच की स्थिति को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

सेक्टर-150 में जलभराव और सुरक्षा इंतजामों की कथित कमी के बीच युवराज मेहता की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद व्यापक आक्रोश देखने को मिला और प्रशासन ने निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित करने की घोषणा की थी। उम्मीद थी कि जांच रिपोर्ट से जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और लापरवाही उजागर होगी।

लेकिन महीनों बाद भी न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई सामने आई है।

जांच के बीच बढ़ी जिम्मेदारी

घटना के समय सेक्टर-150 क्षेत्र में सिविल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत प्रवीण सलोनिया का नाम भी जांच के दायरे में आया था। बावजूद इसके, हाल ही में उन्हें सर्किल-3, सर्किल-7 और हेल्थ विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।

यह निर्णय कई सवाल खड़े कर रहा है—

  • क्या SIT ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है?
  • यदि नहीं, तो जांच पूरी होने से पहले अतिरिक्त जिम्मेदारी क्यों?
  • क्या यह फैसला जांच की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा?

परिजनों की मांग: रिपोर्ट सार्वजनिक हो

युवराज मेहता के परिजन लगातार मांग कर रहे हैं कि SIT रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।

स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि सेक्टर-150 जैसे विकसित माने जाने वाले क्षेत्र में यदि बुनियादी सुरक्षा इंतजामों में कमी रही, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।

प्रशासन की चुप्पी

अब तक प्राधिकरण की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। न तो SIT रिपोर्ट की स्थिति स्पष्ट की गई है और न ही अतिरिक्त प्रभार देने के निर्णय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता ही ऐसे मामलों में विश्वास बहाल करने का एकमात्र रास्ता है। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना और जिम्मेदारी तय करना प्रशासनिक जवाबदेही की पहली शर्त होनी चाहिए।


सेक्टर-150 डूबने कांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन परिजनों के सवालों का जवाब देता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।