सोमवार, 12 जनवरी 2026

लखनऊ : राष्ट्रीय युवा दिवस पर बालिका विद्यालय में विविध कार्यक्रमों का हुआ आयोजन||Lucknow:Various programs were organized at a girls' school on National Youth Day.||

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लखनऊ : 
राष्ट्रीय युवा दिवस पर बालिका विद्यालय में विविध कार्यक्रमों का हुआ आयोजन।
● छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन को बनाया अपना आदर्श।
दो टूक : स्वामी विवेकानंद जी की 163 वीं जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस पर सोमवार  बालिका विद्यालय इण्टरमीडिएट कालेज मोतीनगर लखनऊ में स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर आधारित विविध कार्यक्रमो का आयोजना किया गया। जहाँ गुरुजनों के सानिध्य मे छात्राओं ने अनेकों कार्यक्रम कर प्रेरणा ली।
विस्तार :
भारत की आत्मा जिन महापुरुषों के चिंतन में सघन रूप से अभिव्यक्त हुई है उनमें स्वामी विवेकानंद का स्थान सर्वोच्च है। वे केवल एक संन्यासी, दार्शनिक या धर्मप्रचारक नहीं थे बल्कि आधुनिक भारत के नवजागरण के शिल्पी, युवाशक्ति के प्रखर वक्ता और विश्वमानवता के प्रवक्ता थे। उनके जन्मदिवस 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाना केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं बल्कि उनके जीवन-दर्शन की राष्ट्रीय स्वीकृति है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बाल्यकाल से ही वे तीक्ष्ण बुद्धि, प्रश्नाकुल मन और निर्भीक स्वभाव के धनी थे। श्रीरामकृष्ण परमहंस के सान्निध्य में उनके व्यक्तित्व ने आध्यात्मिक ऊँचाइयों को प्राप्त किया परंतु यह अध्यात्म जीवन से विमुखता नहीं बल्कि जीवन-संलग्न, कर्मशील और समाजोन्मुख रहा। विवेकानंद का दर्शन वेदांत की भूमि पर खड़ा होकर भी आधुनिक विज्ञान, तर्क और मानवतावाद से संवाद करता है। उनका प्रसिद्ध कथन - उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” युवाओं के लिए केवल प्रेरक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन-सूत्र है। भारत सरकार ने वर्ष 1984 में स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को उनके आदर्शों, चिंतन और कर्मपथ से जोड़ना है। स्वामी विवेकानंद युवाओं को राष्ट्र की वास्तविक शक्ति मानते थे। उनका विश्वास था कि यदि युवा आत्मविश्वास, चरित्रबल और सेवा-भाव से युक्त हों तो कोई भी राष्ट्र विश्वगुरु बन सकता है। उनका कथन “मुझे सौ ऐसे युवा दे दो जो निर्भीक हों, पवित्र हों और निस्वार्थ हों, मैं भारत का कायाकल्प कर दूँगा” युवा-नीति के घोषणापत्र जैसा है। स्वामी विवेकानंद की युवासंकल्पना केवल रोजगार या शारीरिक शक्ति तक सीमित नहीं थी। वे युवाओं में आत्मगौरव, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और मानवसेवा का बीजारोपण करना चाहते थे। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण भारत की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का वैश्विक उद्घोष था। “सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका” से प्रारंभ हुआ उनका संबोधन आज भी विश्वबंधुत्व और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक माना जाता है। यह संदेश आज के युवा के लिए और भी प्रासंगिक है, जब विश्व संघर्ष, विभाजन और असहिष्णुता से जूझ रहा है। बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोतीनगर, लखनऊ में विवेकानंद जयन्ती पर आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को यह बताते हुए प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने विषय प्रवर्तन किया। यह कार्यक्रम भारत विकास परिषद, महिला शाखा, चौक, लखनऊ के सहयोग से आयोजित किया गया था जिसकी समन्वयकद्वय ऋचा अवस्थी और मंजुला यादव थीं। कार्यक्रम में शालिनी श्रीवास्तव, अनीता श्रीवास्तव और प्रतिभा रानी का भी सहयोग रहा। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने भारत विकास परिषद महिला शाखा चौक लखनऊ की अध्यक्ष कंचन अग्रवाल, सचिव मंजू अग्रवाल , सदस्य अल्का अग्रवाल और प्रीति अग्रवाल का विद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया। कार्यक्रम का प्रारंभ स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माला पहनाकर और पुष्प अर्पित करके किया गया। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 11 की छात्रा चाहत ने किया। कक्षा 9 की छात्रा सौम्या माथुर ने स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा धारण करके शिकागो में दिए गए उनके भाषण को बखूबी प्रस्तुत किया। उसके पश्चात स्लोगन, पोस्टर और कविता पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। पोस्टर प्रतियोगिता में कक्षा 11 की कुमकुम को प्रथम और कक्षा 9 की काजल तिवारी को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। कविता पाठ प्रतियोगिता में कक्षा 11 की कुमकुम को प्रथम और कक्षा 8 की शिवानी को द्वितीय स्थान मिला। स्लोगन प्रतियोगिता में कक्षा 9 की सोनी को प्रथम और शगुन को द्वितीय स्थान मिला। सभी विजयी छात्राओं को भारत विकास परिषद, महिला शाखा, चौक द्वारा पुरस्कृत किया गया और साथ ही समस्त छात्राओं को ठंडक से बचाव हेतु मोजे एवं पुष्टाहार प्रदान किये गए। कार्यक्रम में उमा रानी यादव, सीमा आलोक वार्ष्णेय, पूनम यादव, उत्तरा सिंह, माधवी सिंह, मीनाक्षी गौतम उपस्थित रहीं।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ० लीना मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल अतीत की स्मृति नहीं, वे भविष्य की संभावना हैं और राष्ट्रीय युवा दिवस उसी संभावना का उत्सव इस अवसर पर कालेज मे भारत विकास परिषद द्वारा ठंडक से बचाव हेतु छात्राओं को बांटे गए मोजे।