गौतमबुद्धनगर: FDRC: न्याय और करुणा के संग पारिवारिक विवादों का मानवीय समाधान!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक:: लखनऊ | 06 जनवरी 2026
माननीय राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष श्रीमती डॉ. बबिता सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित पारिवारिक विवाद निवारण क्लिनिक (Family Dispute Resolution Clinic – FDRC) को सामाजिक सौहार्द, महिला सशक्तिकरण और न्यायिक मानवीयकरण की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय, जन-केंद्रित और दूरदर्शी पहल बताया है।
उन्होंने कहा कि FDRC का उद्देश्य पारिवारिक कलह, वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा एवं दहेज उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों का समाधान दंडात्मक कार्रवाई के बजाय परामर्श, मध्यस्थता और संवाद के माध्यम से करना है, जिससे पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया, सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा से बचाया जा सके। यह पहल कानून और सहानुभूति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए न्याय को अधिक मानवीय स्वरूप प्रदान करती है।
डॉ. बबिता सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2019 में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और शारदा विश्वविद्यालय के मध्य हुए एमओयू के माध्यम से इस प्रयोगात्मक पहल की नींव रखी गई थी, जिसका 10 जुलाई 2020 को औपचारिक शुभारंभ हुआ। आज यह मॉडल प्रदेश के लिए एक प्रभावी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में उभर चुका है, जिससे न्यायालयों और पुलिस तंत्र पर बढ़ते दबाव में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि FDRC के अंतर्गत संचालित क्लिनिकों में पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षित काउंसलर, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आवश्यकतानुसार विधिक विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम कार्य करती है। यह टीम गोपनीय, निष्पक्ष और दबाव-मुक्त वातावरण में विवादों का समाधान सुनिश्चित करती है। विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति से महिलाओं को अपनी बात निर्भीकता से रखने का सुरक्षित मंच प्राप्त होता है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि जहाँ परामर्श एवं मध्यस्थता से समाधान संभव नहीं होता अथवा गंभीर आपराधिक तथ्य सामने आते हैं, वहाँ कानून के अनुसार कठोर एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।
डॉ. बबिता सिंह चौहान ने यह स्वीकार किया कि प्रशिक्षित काउंसलरों की सीमित उपलब्धता, सामाजिक दबाव और जन-जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। इनसे निपटने के लिए उन्होंने पुलिस, महिला आयोग, गैर-सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के बीच समन्वित सहयोग, निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों, व्यापक जन-जागरूकता अभियानों तथा मनोवैज्ञानिक एवं विधिक सहायता के विस्तार पर विशेष बल दिया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि FDRC जैसी पहलें न केवल पारिवारिक विवादों के समाधान में सहायक सिद्ध होंगी, बल्कि समाज में संवाद, सह-अस्तित्व और विश्वास की संस्कृति को भी सुदृढ़ करेंगी।।
