अम्बेडकरनगर :
गणतंत्र भारत की आत्मा,भारत की शक्ति।।
अपर जिला अधिकारी वित्त एवं राजस्व की कलम से।
।।पूनम तिवारी।।
दो टूक : 26 जनवरी केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि भारत की संवैधानिक चेतना का उत्सव है।यही वह दिन है जब स्वतंत्र भारत ने स्वयं को एक संपूर्ण गणतंत्र के रूप में प्रतिष्ठित किया—जहाँ सत्ता का स्रोत जनता है, और शासन का उद्देश्य जनकल्याण। गणतंत्र का अर्थ केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि न्याय, समानता, स्वतंत्रता और अवसरों की निरंतर यात्रा है।
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने चुनौतियाँ असंख्य थीं—भूख, अशिक्षा, अविकसित अर्थव्यवस्था और सीमित संसाधन। किंतु गणतंत्र ने हमें वह संवैधानिक आधार दिया, जिसने भारत को कृषि प्रधान समाज से आधुनिक वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर किया।
कृषि : अन्नदाता से अर्थव्यवस्था का आधार
आज भारत खाद्यान्न, दूध, फल-सब्ज़ी और दालों के उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में है। हरित क्रांति से लेकर डिजिटल कृषि तक भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल की। किसान आज केवल उत्पादक नहीं, बल्कि बाज़ार, प्रोसेसिंग और निर्यात श्रृंखला का सक्रिय भागीदार है।
उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग : आत्मनिर्भर भारत की नींव
मेक इन इंडिया, पीएलआई योजनाओं और उद्यमशीलता के विस्तार ने भारत को विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और रक्षा उत्पादन में भारत आज वैश्विक भरोसे का केंद्र बन चुका है।
सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप : भारत की बौद्धिक शक्ति
आईटी, स्टार्टअप, फिनटेक और डिजिटल गवर्नेंस ने भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित किया। यूपीआई, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने शासन को पारदर्शी और सुलभ बनाया।
विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार
चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता के प्रतीक हैं। कम लागत और उच्च विश्वसनीयता के साथ भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम विश्व के लिए उदाहरण बन चुका है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव विकास
आयुष्मान भारत, नई शिक्षा नीति और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने मानव विकास के संकेतकों को सुदृढ़ किया है। गणतंत्र का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब विकास हर नागरिक तक पहुँचे।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा : नए भारत की पहचान।
एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेनें, मेट्रो, पोर्ट, एयरपोर्ट और नवीकरणीय ऊर्जा—आज का भारत विकास को देखा और महसूस किया जा सकता है। ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी अब भारत की नीति का मूल तत्व है।
पर्यावरण और नदियाँ नमामि गंगे, जल जीवन मिशन और नदियों के पुनर्जीवन से भारत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया है।
वैश्विक मंच पर भारत G20, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की भूमिका यह दर्शाती है कि गणतंत्र भारत अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि दिशा-निर्देशक है।
उत्तर प्रदेश : परिवर्तन का प्रतीक
उत्तर प्रदेश आज इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, कानून-व्यवस्था और औद्योगिक विकास में नए भारत की प्रयोगशाला बन रहा है।
गणतंत्र कोई ठहराव नहीं, बल्कि निरंतर प्रगति की चेतना है।
यह हमें अधिकार देता है, और साथ ही कर्तव्य भी सौंपता है। आज का भारत आत्मविश्वासी है, समावेशी है और भविष्य के लिए तैयार है।
यही गणतंत्र की सच्ची विजय है।
