शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: अवैध निर्माण पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सख्त चोट: खेड़ा चौगानपुर में 8 टावर सील, 100+ फ्लैट्स पर ताला!!

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गौतमबुद्धनगर: अवैध निर्माण पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सख्त चोट: खेड़ा चौगानपुर में 8 टावर सील, 100+ फ्लैट्स पर ताला!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// ग्रेटर नोएडा। अवैध निर्माण और बिना अनुमति के विकसित की जा रही कॉलोनियों पर सख्ती दिखाते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बृहस्पतिवार को बड़ी कार्रवाई की। प्राधिकरण की टीम ने खेड़ा चौगानपुर गांव में अधिसूचित जमीन पर बनाए जा रहे 8 अवैध रिहायशी टावरों को सील कर दिया। इन टावरों में निर्मित 100 से अधिक फ्लैट्स को भी पूरी तरह सील कर दिया गया, जिससे अवैध कॉलोनाइजरों में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि संबंधित कॉलोनाइजर बिना नक्शा पास कराए और प्राधिकरण से किसी भी प्रकार की अनुमति लिए बिना ही बहुमंजिला फ्लैटों का निर्माण कर रहे थे। यह निर्माण कार्य प्राधिकरण की अधिसूचित जमीन पर किया जा रहा था, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रवि कुमार एन.जी. के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया और मौके पर पहुंचकर सीलिंग की कार्रवाई अमल में लाई गई।

प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से अवैध निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। जांच के दौरान पाया गया कि बिल्डरों द्वारा न तो मानचित्र स्वीकृत कराया गया था और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी। इसके बावजूद फ्लैटों की बुकिंग और बिक्री की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी, जिससे आम खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की आशंका भी जताई जा रही है।

कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण की टीम के साथ पुलिस बल भी मौजूद रहा, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैले। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आगे भी ऐसे अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्राधिकरण ने आम नागरिकों और संभावित खरीदारों से अपील की है कि किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले उसकी वैधता, नक्शा पास होने की स्थिति और प्राधिकरण से अनुमोदन की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

इस सख्त कार्रवाई को प्राधिकरण की अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस नीति” का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में अनियमित निर्माण पर रोक लगाने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।