शनिवार, 15 नवंबर 2025

गौतमबुद्धनगर: “गोल्डन आवर में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बढ़ेगी जीवन रक्षा की संभावना” !!

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गौतमबुद्धनगर: “गोल्डन आवर में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बढ़ेगी जीवन रक्षा की संभावना” !!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक:: गौतमबुद्धनगर में Zero Fatality District कार्यक्रम के तहत पुलिसकर्मियों को दिया गया CPR व लाइफ-सेविंग तकनीकों का प्रशिक्षण

गौतमबुद्धनगर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करने और ‘गोल्डन आवर’ में त्वरित राहत सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा Zero Fatality District (ZFD) कार्यक्रम को गंभीरता से लागू किया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश एवं अपर पुलिस महानिदेशक यातायात के निर्देश पर प्रदेश के 20 जनपदों/कमिश्नरेटों को इस मिशन के लिए चिन्हित किया गया है, जिसमें कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर भी शामिल है।

इस अभियान के अंतर्गत जनपद के 09 पुलिस थानों को क्रिटिकल पुलिस स्टेशन घोषित किया गया है, जिनके अंतर्गत आने वाले NH–334C एवं NH–2 मार्गों को भी क्रिटिकल कॉरिडोर चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में दुर्घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए 09 Critical Corridor Teams (CC Teams) का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में एक उपनिरीक्षक व चार आरक्षी तैनात किए गए हैं, जिनका मुख्य कार्य दुर्घटना की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुँचकर घायलों को नज़दीकी अस्पताल तक सुरक्षित पहुँचाना, घटनास्थल की जाँच करना तथा कारणों का विश्लेषण कर संबंधित विभागों से समन्वय कर समाधान सुनिश्चित कराना है।

यातायात माह–2025 के दौरान कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के पुलिस उपायुक्त यातायात और संयुक्त पुलिस आयुक्त के पर्यवेक्षण में फेलिक्स अस्पताल की विशेषज्ञ टीम द्वारा सेक्टर–108 सभागार में CPR (Cardio Pulmonary Resuscitation)Basic Life-Saving Techniques का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण में CC Teams और डायल–112 पुलिसकर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा मॉडल डमी पर हार्ट-रेस्क्यू स्किल्स का प्रैक्टिकल अभ्यास कर आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता को और मजबूत किया।

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा तय किए गए सड़क दुर्घटनाओं में 50% कमी के लक्ष्य को साधने की दिशा में यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल पुलिसकर्मियों की जीवन-रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि दुर्घटनाओं में समय पर सहायता पहुँचाकर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकेगी।।