गौतमबुद्धनगर: ओखला पक्षी अभयारण्य में दिखा दुर्लभ मध्य एशियाई सफेद सारस, तीन दिन से बना आकर्षण; पक्षी प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह!!
दो टूक//नोएडा। दिल्ली-एनसीआर के वन्यजीव और पक्षी प्रेमियों के लिए एक बेहद खास और रोमांचक खबर सामने आई है। नोएडा स्थित ओखला पक्षी अभयारण्य में दुर्लभ सफेद सारस (व्हाइट स्टॉर्क) दिखाई दिया है। इस खूबसूरत प्रवासी पक्षी के आगमन से प्रकृति प्रेमियों, पक्षी विशेषज्ञों और वन्यजीव फोटोग्राफरों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि इस पक्षी को संभावित रूप से सफेद सारस की दुर्लभ मध्य एशियाई उप-प्रजाति Ciconia ciconia asiatica माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, 1 नवंबर को डॉ. तेजस्वी ने पहली बार ओखला पक्षी अभयारण्य में इस दुर्लभ पक्षी को देखा था। इसके बाद लगातार तीन दिनों तक इसकी मौजूदगी दर्ज की गई। इस खबर के सामने आने के बाद बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी और फोटोग्राफर इसकी एक झलक पाने के लिए अभयारण्य पहुंच रहे हैं।
मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचा दुर्लभ मेहमान
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुर्लभ उप-प्रजाति मुख्य रूप से मध्य एशिया के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों, विशेषकर उज्बेकिस्तान और कजाखस्तान के दक्षिणी हिस्सों में प्रजनन करती है। सर्दियों के दौरान इनका प्रवास दक्षिण दिशा में ईरान होते हुए भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचता है। ऐसे में ओखला पक्षी अभयारण्य में इस संभावित मध्य एशियाई उप-प्रजाति का दिखाई देना वैज्ञानिक और पारिस्थितिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में बेहद दुर्लभ है सफेद सारस की मौजूदगी
ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, सफेद सारस दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बेहद दुर्लभ प्रवासी पक्षी रहा है। इससे पहले मार्च 1992 और फरवरी 2005 में ओखला पक्षी अभयारण्य में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। इसके अलावा वर्ष 2004-05 की सर्दियों में पलवल और मार्च 2019 में जेवर के निकट भी इसे देखे जाने के रिकॉर्ड सामने आए थे। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद ओखला में इसकी मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
यमुना नदी के आसपास फैले आर्द्रभूमि क्षेत्र और ओखला पक्षी अभयारण्य का प्राकृतिक वातावरण प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है। यहां दुर्लभ प्रजातियों का पहुंचना इस क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय महत्ता को भी दर्शाता है।
वन विभाग ने संरक्षण प्रयासों को बताया अहम
इस दुर्लभ पक्षी के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) रजनीकांत मित्तल ने कहा कि ओखला पक्षी अभयारण्य में व्हाइट स्टॉर्क का दिखाई देना यहां के समृद्ध आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है। वन विभाग अभयारण्य के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
उन्होंने प्रकृति प्रेमियों से अपील की कि वे अभयारण्य में भ्रमण के दौरान शांति और स्वच्छता बनाए रखें तथा पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार में किसी प्रकार का व्यवधान न डालें।
पक्षी विशेषज्ञों और फोटोग्राफरों के लिए बना खास आकर्षण
प्रसिद्ध प्रकृतिविद् एवं वन्यजीव फोटोग्राफर निखिल देवसर ने इस दुर्लभ नजारे को पक्षी प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में व्हाइट स्टॉर्क को देखना अपने आप में असाधारण अनुभव है। खासकर यदि यह दुर्लभ मध्य एशियाई एशियाटिका उप-प्रजाति है, तो इसका वैज्ञानिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के दुर्लभ प्रवासी पक्षी हमें याद दिलाते हैं कि हमारे नदी क्षेत्रों और प्राकृतिक आवासों में आज भी प्रकृति के अनेक अनदेखे आश्चर्य मौजूद हैं।
वहीं, पक्षी प्रेमी रोहित शर्मा ने कहा कि पिछले तीन दिनों से ओखला पक्षी अभयारण्य में इस दुर्लभ पक्षी को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह है। शहरी क्षेत्र के बीच स्थित इस अभयारण्य में इतने शानदार और दुर्लभ प्रवासी पक्षी का दिखाई देना संरक्षित आर्द्रभूमियों के महत्व को रेखांकित करता है। ऐसे अनुभव लोगों को प्रकृति के करीब लाने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी करते हैं।
प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग सतर्क
वन विभाग की ओर से इस पूरे प्रवासी सीजन के दौरान अभयारण्य में आने वाले दुर्लभ पक्षियों और अन्य शीतकालीन प्रवासियों की सुरक्षा के लिए निगरानी रखी जा रही है। पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे अभयारण्य में अनुशासन बनाए रखें, शोर न करें और पक्षियों को परेशान करने से बचें।
ओखला पक्षी अभयारण्य में दुर्लभ सफेद सारस का आगमन न केवल नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के पक्षी प्रेमियों के लिए खुशखबरी है, बल्कि यह भी बताता है कि प्राकृतिक आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित भविष्य के लिए कितना जरूरी है।
