गौतमबुद्धनगर: जिला कारागार में 2118 बंदी निरुद्ध, किशोर और महिला बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था का लिया जायजा!!
विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिवानी रावत ने किया मासिक निरीक्षण, बंदियों से संवाद कर जानी मुकदमों की स्थिति और समस्याएं
दो टूक//गौतमबुद्धनगर, 5 नवंबर 2026। जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में निरुद्ध बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने और जरूरतमंद बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिवानी रावत ने जिला कारागार का मासिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किशोर बैरकों और महिला बैरक का जायजा लेकर बंदियों से सीधे संवाद किया तथा उनके मुकदमों की स्थिति, कानूनी सहायता और जेल में मिल रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान उप जेलर सुरजीत सिंह उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन की ओर से अवगत कराया गया कि वर्तमान में जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में कुल 2118 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग के 43 किशोर बंदी भी शामिल हैं। सचिव शिवानी रावत ने किशोर बैरकों का निरीक्षण करते हुए बंदियों से उनके मुकदमों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी ली। साथ ही यह भी पूछा कि उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता योजना के अंतर्गत अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया है या नहीं और उन्हें अपने मामलों की पैरवी में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही है।
इसके बाद उन्होंने महिला बैरक का निरीक्षण कर वहां निरुद्ध महिला बंदियों से बातचीत की। उन्होंने महिलाओं के मुकदमों, उनकी कानूनी पैरवी, निःशुल्क विधिक सहायता तथा जेल में होने वाली किसी भी प्रकार की असुविधा के संबंध में जानकारी ली। महिला बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान महिला सेल में तैनात पीएलवी (पैरा लीगल वालंटियर) महिला बंदी के रिहा होने के बाद विधिक सहायता से जुड़े कार्यों के सुचारू संचालन को लेकर भी चर्चा की गई। सचिव ने कारागार प्रशासन को निर्देशित किया कि महिला बंदियों में से किसी उपयुक्त एवं शिक्षित महिला बंदी को पीएलवी के रूप में नामित किया जाए, ताकि महिला बंदियों की कानूनी समस्याओं और शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
शिक्षित बंदियों को पीएलवी बनाकर उपलब्ध कराई जाती है विधिक सहायता
सचिव शिवानी रावत ने बताया कि जिला कारागार में निरुद्ध शिक्षित बंदियों में से उपयुक्त बंदियों को पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) के रूप में नामित किया जाता है। इसका उद्देश्य जेल में निरुद्ध महिला एवं पुरुष बंदियों की समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से जिला कारागार प्रशासन के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से बंदियों को उनके मुकदमों से संबंधित जानकारी, कानूनी पैरवी और अन्य आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि बंदियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश दिए जाते हैं, जिससे कोई भी जरूरतमंद बंदी आर्थिक अभाव के कारण कानूनी सहायता से वंचित न रहे।
इस मासिक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों के विधिक अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना रहा।।
