शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

सीतापुर : अमृत योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस,पांच हजार की आबादी प्यासी।।||Sitapur:The Amrit Yojana pipeline has become a showpiece, leaving a population of five thousand thirsty.।।

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सीतापुर :
अमृत योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस, पांच हजार की आबादी प्यासी।।
।।राकेश कुमार।।
दो टूक : सरकार की हर घर नल योजना के दावों की जमीनी हकीकत सीतापुर के गोदलामऊ क्षेत्र की असुवामऊ ग्राम पंचायत में सवाल खड़े कर रही है। गांव में अमृत योजना के तहत पानी की पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए पानी नहीं पहुंचा। हालात यह हैं कि पांच हजार की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रही है और पाइपलाइन पर लगी टोटियां तक गायब हैं। सरकारी योजना का लाभ मिलने के बजाय ग्रामीणों के हिस्से में बट्टा-बांट और परेशानी आई है।
●विस्तार :
पाइप बिछी, पानी गायब; आखिर कहां गईं टोटियां।
जनपद के विकासखंड गोंदलामऊ क्षेत्र असुवामऊ खास के गांव में 'हर घर जल योजना' (जल जीवन मिशन) के तहत गांव में पाइप-लाइन और नल तो लगा दिए गए हैं लेकिन पानी की सप्लाई शुरू न होने के कारण ये टोटियां मात्र एक शोपीस बनकर रह गई हैं ग्रामीणों के मुताबिक पड़ोसी गांव गोदलामऊ में पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से हो रही है, लेकिन असुवामऊ के लोग अब भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गांव में पाइप-लाइन बिछने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंचने से योजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते सरकारी व्यवस्था केवल कागजों और पाइपों तक सिमटकर रह गई है।
गांव की माया देवी, जगरानी, सुनीता, भीम, हरि, बाबा डॉन, रामदुलारे, फुत्तूराम, मनोहर, अनुज, दीपू, पृथ्वी पाल और ललता सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। 
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत लेकर सेक्रेटरी और ग्राम विकास अधिकारी के पास जाने पर भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता। आरोप है कि शिकायत करने वाले ग्रामीणों को डांटकर भगा दिया जाता है। कुछ ग्रामीणों ने विकास कार्य कराए बिना भुगतान पास कराए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
●डीएम के पीआरओ तक पहुंचा मामला,सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज।।
ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर भाजपा युवा नेता मनीष श्रीवास्तव ने उनकी शिकायतें सुनीं और जिलाधिकारी के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) से वार्ता कर पेयजल संकट, साफ सफाई की बदहाली और बंद पड़े शौचालय की समस्या से अवगत कराया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
अब सवाल यह है कि अमृत योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के बावजूद ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा? टोटियां गायब होने और सरकारी भवनों की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है? प्रशासन जांच कराकर जवाबदेही तय करेगा या पांच हजार की आबादी यूं ही पानी के लिए भटकती रहेगी।
● शिकायत करते हुए ग्रामीण महिलाएं की वीडियो।।