बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

लखनऊ : PGI क्षेत्र में चाइनीज मांझे का कहर, अंडा व्यापारी का कटा गला,बार बाल बची जान,सात टांके लगे।Lucknow:Chinese thread wreaked havoc in the PGI area; an egg trader's throat was slit, but he narrowly escaped death with seven stitches.||

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लखनऊ :
PGI क्षेत्र में चाइनीज मांझे का कहर, अंडा व्यापारी का कटा गला,बार बाल बची जान,सात टांके लगे।

●प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक के बावजूद हादसे जारी, पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा राहगीरों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। पीजीआई थाना क्षेत्र के वृंदावन योजना सेक्टर-5 स्थित रमजान नगर चौराहे के पास मंगलवार शाम बाइक से घर लौट रहे 55 वर्षीय अंडा व्यापारी रमजान अली का गला मांझे की चपेट में आकर कट गया। हादसे में उनके गले की दो नसें क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। निजी अस्पताल में उपचार के दौरान गले में सात टांके लगाए गए। फिलहाल व्यापारी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा मांझे की उपलब्धता और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर पुलिस-प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विस्तार :
पीजीआई थाना क्षेत्र के तेलीबाग स्थित गांधी नगर निवासी रमजान अली पुत्र अजीम उल्ला परिवार के साथ रहते हैं और अंडे का कारोबार करते हैं। रमजान अली के मुताबिक, मंगलवार शाम वह दुकानों पर अंडों की सप्लाई करने के बाद मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान वृंदावन योजना सेक्टर-5 में रमजान नगर चौराहे से पहले अचानक चाइनीज मांझा उनके गले से टकरा गया। मांझे की धार से उनका गला कट गया और खून बहने लगा।
●सड़क पर मौत का जाल बना चाइनीज मांझा।।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बाइक की रफ्तार धीमी होने के कारण वह मौके पर ही गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें संभाला और गले पर गमछा बांधकर खून रोकने का प्रयास किया। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया गया और परिजनों को सूचना दी गई। अस्पताल में उपचार के दौरान उनके गले में सात टांके लगाए गए। परिजनों के मुताबिक, गले की दो नसें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। फिलहाल उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
●प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा मांझे पर अंकुश कब।।
चाइनीज और नायलॉन मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद इस तरह की घटनाएं आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। सड़क पर बाइक से निकलने वाला व्यक्ति भी इस अदृश्य खतरे का शिकार हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल रोकने के लिएपीजीआई पुलिस क्षेत्र में कितनी प्रभावी कार्रवाई कर रही है? क्या केवल हादसे के बाद सक्रियता दिखाने से इस खतरे पर लगाम लग पाएगी, या पुलिस को नियमित अभियान चलाकर इसकी बिक्री और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।