बुलंदशहर :भूमि अधिग्रहण और प्रदूषण के खिलाफ देहात मोर्चा ने भरी हुंकार, बोले मन्तराम नागर—“जमीन देने वालों को विकास में मालिकाना हक मिले”
दो टूक// बुलंदशहर/ सिकंदराबाद। राष्ट्रीय देहात मोर्चा की ओर से बुलंदशहर-सिकंदराबाद क्षेत्र के हृदयपुर गांव में “भूमि अधिग्रहण से उजड़ते गांव, जहरीली हवाएं” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में भूमि अधिग्रहण, गांवों की घटती पहचान, प्रदूषण, रोजगार, किसानों और खेतीहर मजदूरों के अधिकारों समेत ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर जिन किसानों और ग्रामीणों की जमीन ली गई, उन्हें उस विकास में उचित हिस्सेदारी और रोजगार का अधिकार मिलना चाहिए।
गोष्ठी में “जमीन हमारी, शहर हमारा तो शहर में वाजिब हिस्सा भी हमारा हो और जो जमीन पर नहीं, जोत पर जिंदा था उसका हिस्सा सबसे पहले हो” का नारा प्रमुखता से गूंजा। वक्ताओं ने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल ऊंची इमारतें, टावर और औद्योगिक क्षेत्र खड़े करना नहीं, बल्कि उन लोगों को भी विकास का भागीदार बनाना है, जिन्होंने अपनी जमीन और मेहनत से उसके लिए आधार तैयार किया है।
मन्तराम नागर ने उठाई ग्रामीणों की आवाज
गोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय देहात मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक प्रिंसिपल मन्तराम नागर मथुरापुर ने ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण द्वारा पिछले करीब 25 वर्षों में बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं के विस्तार के साथ सैकड़ों गांवों की पुरानी पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
मन्तराम नागर ने कहा कि सरकारों की ओर से किसानों को यह भरोसा दिया गया था कि उनकी जमीन से बनने वाले शहरों में उन्हें भी उचित हिस्सा और बेहतर भविष्य मिलेगा, लेकिन शहर तो बस गए, औद्योगिक क्षेत्र खड़े हो गए, बड़े-बड़े कॉम्प्लेक्स बन गए, मगर जमीन देने वाले किसान आज भी अपने अधिकार और हिस्सेदारी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को प्रदूषित हवा और पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। दूसरी ओर, मुआवजे के रूप में मिली रकम धीरे-धीरे समाप्त हो गई और पर्याप्त रोजगार तथा पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने के कारण परिवार आर्थिक संकट में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि जिस जमीन पर कभी किसान खेती करता था, उसी जमीन पर बने कारखानों में उसके बच्चे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
मन्तराम नागर ने कहा कि आबादी के प्लॉट और अन्य सुविधाएं नहीं मिलने से कई ग्रामीण परिवार सीमित जगह में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों और प्राधिकरणों की मनमानी का सबसे अधिक असर किसान, खेतीहर मजदूर और ग्रामीण परिवारों पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि पहली पीढ़ी ने जमीन खोई, दूसरी पीढ़ी ने मुआवजे की रकम खत्म होते देखी और तीसरी पीढ़ी रोजगार एवं भविष्य के संकट से जूझ रही है। “आज ग्रामीण न पूरी तरह किसान रह गए और न ही उद्योगपति बन पाए, बल्कि वे भूमाफिया, बिचौलियों और बदलती व्यवस्था के बीच अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
मन्तराम नागर ने कहा कि राष्ट्रीय देहात मोर्चा ग्रामीण समाज के उन लोगों की आवाज बनने के लिए आगे आया है, जिनके अधिकारों की अनदेखी हुई है। उन्होंने ग्रामीणों से एकजुट होकर अपने जल, जंगल, जमीन, रोजगार, पहचान और भविष्य की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
प्राधिकरण बोर्ड में किसानों की भागीदारी की मांग
राष्ट्रीय महासचिव जयकुमार गुर्जर लुहारली ने कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहित कर उसे उद्योगपतियों और बिल्डरों को ऊंची कीमतों पर दिए जाने की व्यवस्था में किसान की भागीदारी सुनिश्चित नहीं है। उन्होंने मांग की कि प्राधिकरण के बोर्ड में किसानों और भूमिहीन लोगों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि ग्रामीणों की आवाज निर्णय लेने वाली व्यवस्था तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में किसी फैक्ट्री या औद्योगिक इकाई के कारण स्थानीय लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है, वहां के प्रभावित ग्रामीणों को रोजगार और आर्थिक हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेतीहर मजदूर भी जमीन अधिग्रहण के बाद बेरोजगार हुए हैं और उनके लिए भी ठोस पुनर्वास एवं रोजगार नीति जरूरी है।
अधिवक्ता विजेंद्र कसाना ने कानून के प्रावधानों पर डाला प्रकाश
केंद्रीय संचालन समिति के सदस्य एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विजेंद्र कसाना सकलपुरा ने भूमि अधिग्रहण कानून के विभिन्न प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1894 के पुराने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के बाद 2013 में नया कानून बनाया गया, जो जनवरी 2014 से लागू हुआ। उन्होंने कानून में विभिन्न प्रकार की भूमि और गतिविधियों के अधिग्रहण से जुड़े प्रावधानों तथा सोशल इंपैक्ट असेसमेंट और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बहुफसली और सिंचित जमीन के अधिग्रहण को लेकर भी कानून में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों के हितों और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
विचार गोष्ठी को नोएडा मंडल महासचिव डॉ. महेश कुमार मावी, मेरठ मंडल उपाध्यक्ष नंबरदार बेगराज नागर, हापुड़ जिला संयोजक चौधरी जगबीर सिंह, चेयरमैन वीरेंद्र सिंह भाटी जोखाबाद, मास्टर महावीर खारी, चीती प्रधान विजय सिंह, हृदयपुर से कौशल अधाना, जयकुमार भाटी लुहारली सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी प्रताप सिंह ने की, जबकि संचालन दया प्रधान ने किया। इस दौरान बाबूराम प्रमुख सांवली, कमल प्रधान, डॉ. संजय, मुनीराम, अमनदीप, वीर सिंह, ब्रह्म प्रधान, योगेंद्र एडवोकेट, भारत सिंह, सुरेंद्र अवाना, रोहित भाटी तिलपता, रघुराज सिंह मंडावरा, जय सिंह, बलराज, वीर सिंह सहित क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।।
