सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

गौतमबुद्धनगर: रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक संदेश, ‘भीतर के रावण’ पर विजय पाने की प्रेरणा दे रहीं बीके लीना दीदी!!

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गौतमबुद्धनगर: रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक संदेश, ‘भीतर के रावण’ पर विजय पाने की प्रेरणा दे रहीं बीके लीना दीदी!!
 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

राजयोग ध्यान, आत्मिक शांति और सकारात्मक विचारों के जरिए लोगों को आत्मपरिवर्तन का संदेश, क्रोध-अहंकार सहित बुराइयों को त्यागने का आह्वान

दो टूक//नोएडा। नवरात्रि और दशहरे के पावन अवसर पर नोएडा के सेक्टर-46 स्थित रामलीला ग्राउंड में आयोजित रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज के सेक्टर-46 केंद्र की ओर से विशेष आध्यात्मिक स्टॉल लगाया गया है। यह स्टॉल मेले में पहुंच रहे लोगों के बीच राजयोग ध्यान, आत्मिक शांति, सद्भावना और मानवीय मूल्यों का संदेश प्रसारित कर रहा है। ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा संचालित इस स्टॉल के माध्यम से लोगों को जीवन में सकारात्मकता अपनाने और स्वयं के भीतर झांककर आत्मपरिवर्तन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

स्टॉल की प्रमुख संचालिका एवं ब्रह्माकुमारीज सेक्टर-46 केंद्र की प्रभारी बीके लीना दीदी आध्यात्मिक चित्रों, चार्ट और प्रेरणादायी संदेशों के माध्यम से लोगों को दशहरे के पर्व का वास्तविक आध्यात्मिक महत्व समझा रही हैं। उनका संदेश है कि दशहरा केवल रावण के पुतले का दहन करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का भी अवसर है। जब तक मनुष्य अपने अंदर मौजूद क्रोध, अहंकार, लोभ, मोह, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों पर विजय प्राप्त नहीं करता, तब तक सच्चे अर्थों में विजय का उद्देश्य पूरा नहीं होता।

‘भीतर के रावण’ का अंत ही सच्ची विजय

बीके लीना दीदी ने लोगों को समझाया कि रावण दहन के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद उन कमजोरियों पर भी विचार करना चाहिए, जो मन की शांति और आपसी संबंधों को प्रभावित करती हैं। यदि मनुष्य अपने व्यवहार में प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और सद्भावना को स्थान दे, तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। दशहरे का पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है और यही संदेश अपने दैनिक जीवन में उतारना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि राजयोग ध्यान के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दे सकता है। इससे मन को शांत रखने, परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है। जीवन की चुनौतियों के बीच भी धैर्य, प्रसन्नता और आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए आत्मचिंतन बेहद महत्वपूर्ण है। सच्ची विजय वही है, जब मन में शांति, प्रेम, पवित्रता और शुभभावनाओं का प्रकाश जागृत हो।

आत्मपरिवर्तन से ही समाज में आएगा सकारात्मक बदलाव

रामलीला मेले में लगाए गए इस स्टॉल के माध्यम से लोगों को यह संदेश भी दिया जा रहा है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत दूसरों को बदलने से नहीं, बल्कि स्वयं को बदलने से होती है। व्यक्ति यदि अपने विचारों और व्यवहार में सुधार लाए तथा दूसरों के प्रति सम्मान, सहयोग और सद्भावना का भाव रखे, तो परिवार और समाज में बेहतर वातावरण तैयार हो सकता है।

स्टॉल पर पहुंचने वाले लोगों को सेवा, परोपकार, आपसी भाईचारे और सभी के प्रति शुभकामनाएं रखने का महत्व भी बताया जा रहा है। ब्रह्माकुमारीज की बहनें लोगों को प्रेरित कर रही हैं कि वे अपने दैनिक जीवन में कुछ समय आत्मचिंतन और राजयोग ध्यान के लिए अवश्य निकालें, ताकि मानसिक शांति के साथ-साथ उनके व्यवहार में भी सकारात्मकता दिखाई दे।
सेवा भाव से जुटे रहे सहयोगी

इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में बीके ऋतुभेन, बीके रेनू बहन, विजया बहन, रंजना बहन, सुचित्रा बहन, रविंदर भाई, श्रीओम भाई, पंकज भाई और माथुर भाई सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी सहयोगियों द्वारा मेले में आने वाले लोगों तक आध्यात्मिक विचारों और जीवनोपयोगी संदेशों को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सेक्टर-46 के रामलीला मेले में ब्रह्माकुमारीज का यह स्टॉल धार्मिक आयोजन के बीच आध्यात्मिक जागरूकता, आत्मिक शांति और आत्मपरिवर्तन का संदेश दे रहा है। स्टॉल के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे दशहरे पर केवल बाहरी बुराइयों के प्रतीक का दहन न करें, बल्कि अपने भीतर के क्रोध, अहंकार और नकारात्मकता को त्यागने का संकल्प भी लें। यही जीवन में वास्तविक शांति और सच्ची विजय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।।