गौतमबुद्धनगर: दिव्यांगों के हुनर को मिला मंच, 7000 प्लेट्स बांटकर पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल!!
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने शुरू की पहली स्मॉल स्किल इंडस्ट्री, दिव्यांगजनों के हाथों से बने उत्पादों को मिल रहा बाजार
दो टूक//नोएडा, 17 अक्टूबर। हुनर, हौसले और आत्मविश्वास के दम पर दिव्यांगजन भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। इसी सोच को साकार करते हुए फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने दिव्यांगजनों को रोजगार से जोड़ने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने की दिशा में अपनी पहली स्मॉल स्किल इंडस्ट्री की शुरुआत की है। इस पहल के तहत दिव्यांगजनों द्वारा तैयार की गई डिस्पोजेबल प्लेट्स लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। यह प्रयास न केवल उन्हें रोजगार का अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और स्वावलंबन को भी नई मजबूती दे रहा है।
फाउंडेशन की इस डिस्पोजेबल प्लेट्स इंडस्ट्री का उद्घाटन सेंटर मैनेजर सुरभि जैन ने किया। इस पहल को सफल बनाने में प्रसिद्ध फाइनेंस एजुकेटर एवं मोटिवेशनल स्पीकर सागर सिन्हा ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने प्लेट्स को प्रायोजित करने के साथ ही एक ऐसी पहल की, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल आर्थिक सहयोग देना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने हुनर के दम पर सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना भी है।
सागर सिन्हा ने अपील की कि दिव्यांगजनों द्वारा तैयार की गई प्लेट्स का इस्तेमाल भंडारों में किया जाए और उन्हें इन प्लेट्स को स्वयं लोगों तक पहुंचाने का अवसर भी मिले। इस पहल के पीछे सोच यह है कि दिव्यांगजन केवल सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने श्रम, हुनर और क्षमता से समाज में योगदान देने वाले आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में पहचाने जाएं।
नवरात्रि के पावन अवसर पर इस पहल का सकारात्मक असर देखने को मिला। शहर में आयोजित भंडारों के दौरान दिव्यांगजनों द्वारा तैयार की गई करीब 7,000 प्लेट्स श्रद्धालुओं तक पहुंचाई गईं। इन प्लेट्स के वितरण के माध्यम से दिव्यांगजनों को अपनी मेहनत का महत्व समझाने और समाज के बीच अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। यह पहल इस संदेश को भी मजबूत करती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिलने पर दिव्यांगजन भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि वास्तविक राष्ट्र निर्माण तभी संभव है, जब समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज में बराबरी के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना भी है।
उन्होंने इस पहल में सहयोग देने के लिए सागर सिन्हा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ऐसे सहयोगियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। जब सामाजिक संस्थाएं, सहयोगी और समाज मिलकर काम करते हैं, तो जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है।
छह महीने में शुरू होंगी कई और लघु उद्योग इकाइयां
डॉ. महिपाल सिंह ने बताया कि फाउंडेशन की यह पहल अभी शुरुआत है। आने वाले छह महीनों में दिव्यांगजनों को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के उद्देश्य से ऐसी कई अन्य लघु उद्योग इकाइयां शुरू करने की योजना है। इन इकाइयों के माध्यम से उन्हें अपने हुनर को निखारने, उत्पाद तैयार करने और आत्मनिर्भर बनने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की यह पहल समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता और प्रतिभा की सीमा तय नहीं करती। जरूरत है तो केवल उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की। दिव्यांगजनों के हाथों से तैयार हुईं 7,000 प्लेट्स इस बात का प्रतीक हैं कि जब हुनर को सही मंच मिलता है, तो आत्मनिर्भरता का रास्ता खुलता है और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का विश्वास भी मजबूत होता है।।
