गौतमबुद्धनगर: 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे प्रभु श्रीराम, महर्षि नगर में भव्य राज्याभिषेक का मंचन; दीप जलाकर और मिठाइयां बांटकर मनाया जश्न!!
नोएडा के सेक्टर-110 में दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा और उल्लास का माहौल, श्रीराम के जयघोष से गूंजा परिसर; रामराज्य के आदर्शों का दिया संदेश
दो टूक//नोएडा। सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में आयोजित दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव में बुधवार को भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य और भावपूर्ण मंचन किया गया। 14 वर्ष के वनवास की अवधि पूरी करने और लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने तथा उनके राज्याभिषेक के प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंच पर सजी अयोध्या नगरी, भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक और धार्मिक प्रसंगों के सजीव चित्रण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने उत्साह एवं श्रद्धा के साथ इस पावन प्रसंग का आनंद लिया।
भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक की खुशी में महर्षि नगर में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। दीपों की जगमगाहट, श्रद्धालुओं का उत्साह और श्रीराम के जयकारों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं की झलक भी पूरे आयोजन में देखने को मिली।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में हुआ आयोजन
महोत्सव के मीडिया प्रभारी ए.के. लाल ने बताया कि भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के अवसर पर महर्षि महेश योगी संस्थान के अध्यक्ष एवं महर्षि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव तथा राहुल भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहे। महोत्सव के संयोजक रामेंद्र सचान के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। लोगों ने रामलीला के मंचन का आनंद लेते हुए भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को स्मरण किया।
आयोजन में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रामराज्य के आदर्शों को अपनाने का संदेश
भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, न्याय, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा जैसे जीवन मूल्यों का प्रतीक भी है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए। उनका राज्याभिषेक एक ऐसे आदर्श शासन की परिकल्पना को दर्शाता है, जिसमें प्रजा का हित सर्वोपरि हो और प्रत्येक व्यक्ति को न्याय, सम्मान तथा समान अवसर प्राप्त हों।
रामराज्य की अवधारणा आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह हमें अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की सीख देती है। भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त समाज की स्थापना की जा सकती है।
आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का संगम बना महोत्सव
महर्षि नगर में आयोजित दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव धार्मिक आस्था, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण बन रहा है। भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के मंचन ने श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा और उत्सव में भक्ति, उल्लास तथा उमंग का संचार किया।
दीप प्रज्वलित कर और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाने की परंपरा ने आयोजन को और भी खास बना दिया। इस अवसर ने लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कराने के साथ परिवार, समाज और संस्कृति के प्रति अपने जुड़ाव को मजबूत करने का संदेश भी दिया। महर्षि नगर में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक सौहार्द और भारतीय परंपराओं के संरक्षण की भावना को भी आगे बढ़ा रहा है।
