लखनऊ :
NSG-ATS समेत कई एजेंसियों ने कसी कमर,तीन दिन चला आतंकरोधी ऑपरेश।।
●कई सुरक्षा एजेंसियों ने परखी सुरक्षा की ताकत।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में आतंकी हमले या किसी बड़ी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 16, 17 और 18 सितंबर को तीन दिवसीय एंटी-टेरर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। NSG, ATS, पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ और जिला प्रशासन के संयुक्त अभियान में शहर के प्रतिष्ठित एवं महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को बारीकी से परखा गया। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित आतंकी खतरे की स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम, आपसी समन्वय, घेराबंदी, रेस्क्यू और मेडिकल इवैक्यूएशन की तैयारियों का वास्तविक परिस्थितियों जैसा अभ्यास किया।
विस्तार :
कमजोर कड़ियों की तलाश, सुरक्षा व्यवस्था का हुआ ऑडिट।
मॉक ड्रिल के दौरान सरकारी भवनों, अस्पतालों, परिवहन केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की सुरक्षा व्यवस्था का जोखिम मूल्यांकन किया गया। सुरक्षा में संभावित कमजोरियों की पहचान कर निवारक उपायों को परखा गया, ताकि किसी वास्तविक घटना की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
◆घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने संभाला मोर्चा।
अभ्यास के दौरान स्थानीय पुलिस को फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका में रखा गया। घटना स्थल की घेराबंदी, अनधिकृत प्रवेश पर रोक, भीड़ नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ विशेष बलों एवं राहत टीमों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने का अभ्यास किया गया। संयुक्त घटना कमांड पोस्ट (JICP) के माध्यम से पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, अग्निशमन, SDRF, ट्रैफिक, खुफिया एजेंसियों और संबंधित संस्थानों के सुरक्षा अधिकारियों के बीच रियल-टाइम समन्वय स्थापित किया गया।
●NSG-ATS के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर।
सिमुलेटेड आतंकी खतरे के आधार पर NSG और ATS की तैनाती की तैयारियों को भी परखा गया। विशेष बलों की तेज आवाजाही और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए स्थानीय पुलिस ने पायलट एस्कॉर्ट और ट्रैफिक डायवर्जन के जरिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने का अभ्यास किया।
●अफवाहों पर लगाम और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग पर जोर।
मॉक ड्रिल में सिर्फ हथियारबंद खतरे से निपटने की तैयारी ही नहीं, बल्कि घटना के बाद पैदा होने वाली अफवाहों और भीड़ की घबराहट को नियंत्रित करने का भी अभ्यास किया गया। आधिकारिक जानकारी के लिए निर्धारित प्रवक्ता और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का तत्काल खंडन करने की रणनीति को भी परखा गया।
●बंधक संकट से रणनीतिक रेस्क्यू तक हुआ अभ्यास।
तीन दिन चली इस एक्सरसाइज में बंधक बनाए जाने की स्थिति, तलाशी अभियान और रणनीतिक बचाव कार्यों जैसी संभावित परिस्थितियों का सघन अभ्यास किया गया। NSG, ATS, लखनऊ पुलिस, फायर सर्विस, ट्रैफिक पुलिस, SDRF और मेडिकल टीमों के बीच तालमेल ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों को परखा।
दो टूक मीडिया के अनुसार, इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी आतंकी या बड़े आपात संकट की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए कम से कम समय में अधिकतम प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना और आम जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना रहा।
