लखनऊ :
किश्त नहीं चुकाई तो रिकवरी एजेंट ने मजदूर को पांच दिन बंधक बना की बर्बरता।।
●पिटाई और जबरन मजदूरी-फिर खून भी निकलवाने का आरोप।
●डीसीपी के दरबार पहुंचा पीड़ित परिवार तो पुलिस ने दर्ज किया मुकदम।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना निगोहां क्षेत्र में मोबाइल की किश्त वसूलने का दावा करने वालों ने कथित तौर पर वसूली की ऐसी हद पार कर देने का मामला सामने आया सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं। रिकवरी एजेंट ने एक मजदूर को कथित तौर पर गांव से जबरन उठाकर लखनऊ के एक मकान में पांच दिन तक कैद रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई, जबरन मजदूरी कराई गई और बकाया किश्त के नाम पर उसे ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून तक निकलवा लिया गया।
परिवार का आरोप है कि बंधक बनाए गए मजदूर से उसके बड़े भाई को फोन कराया गया और पहले ₹2,799 ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद ₹12,500 और मांग लिए गए। रकम देने के बाद भी मजदूर को आजाद नहीं किया गया। पांच दिन बाद पुलिस के हस्तक्षेप पर उसे रैपिडो बाइक से निगोहां थाने भेज दिया गया।
विस्तार:
गांव से उठाया, शहर के मकान में कैद किया।
पुरहिया मजरा राजारामखेड़ा निवासी बुजुर्ग जदूराई ने डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक से शिकायत की कि उनका छोटा बेटा नेवल ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता है। करीब एक वर्ष पहले उसने निगोहां की गीता मोबाइल शॉप से जीरो डाउन पेमेंट पर मोबाइल लिया था। किश्त बकाया होने पर मोबाइल पहले ही ले लिया गया था।
आरोप है कि 8 सितंबर को स्कूटी सवार दो युवक गांव पहुंचे और नेवल को जबरन अपने साथ ले गए। इसके बाद शहर के एक मकान में उसे कथित तौर पर बंद कर दिया गया। परिवार का कहना है कि पांच दिनों तक उसकी पिटाई की गई और उससे जबरन काम कराया गया।
●वसूली की रकम से आगे बढ़ा मामला।
आरोपियों ने नेवल से उसके बड़े भाई राजकुमार को फोन कराया। उससे तत्काल ₹2,799 भेजने को कहा गया। राजकुमार ने यूपीआई से रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद आरोपियों ने ₹12,500 और मांगे। परिवार का आरोप है कि दूसरी रकम की मांग के बावजूद नेवल को रिहा नहीं किया गया।
●खून निकलवाने का गंभीर आरोप।
परिवार ने आरोप लगाया कि नेवल को बंधक रखने के दौरान ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां उससे एक यूनिट रक्त निकलवाया गया। इस आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि रक्त निकलवाने की परिस्थितियां और इसके पीछे की वास्तविकता पुलिस जांच का विषय है।
●मां बेटे की तलाश में पहुची थाने,सामने आया मामला।
बेटे के पांच दिन से गायब और बंधक होने की जानकारी मिलने पर बुजुर्ग मां अपने बड़े बेटे के साथ निगोहां थाने पहुंची। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों से संपर्क किया। इसके बाद पांचवें दिन नेवल को रैपिडो बाइक से थाने भेज दिया गया।
परिवार का आरोप है कि थाने पहुंचने के बाद भी तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और उन्हें कार्रवाई का भरोसा देकर वापस भेज दिया गया। दो दिन तक परिवार थाने के चक्कर काटता रहा।
●डीसीपी तक पहुंची फरियाद तो दर्ज हुआ बर्बरता का मुकदमा।
सोमवार को पीड़ित ने अपनी मां और भाई के साथ डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक से मुलाकात कर पूरी घटना बताई। मामला सुनते ही डीसीपी ने थाना प्रभारी को तत्काल मुकदमा दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
इसके बाद पुलिस ने एक नामजद और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाने समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई न करने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
किश्त वसूली के नाम पर मजदूर को कथित तौर पर बंधक बनाने और उसके साथ मारपीट से लेकर खून निकलवाने तक के आरोपों ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। अब पुलिस की जांच पर निगाह है कि इस कथित वसूली की असल कहानी क्या है और इसके पीछे कितने लोग शामिल हैं।
