सोमवार, 21 सितंबर 2026

लखनऊ :फर्जी फास्टैग से करोड़ों के राजस्व को चूना लगाने वाले गिरोह का सदस्य गिरफ्तार।||Lucknow:Member of gang that defrauded revenue worth crores through fake Fastags arrested.||

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लखनऊ :
फर्जी फास्टैग से करोड़ों के राजस्व को चूना लगाने वाले गिरोह का सदस्य गिरफ्तार।
दो टूक : लखनऊ के थाना सरोजनीनगर मे दर्ज फर्जी फास्टैग से करोड़ों के राजस्व को चूना लगाने के मामले मे UPSTF टीम ने गिरोह के एक आरोपी को गिरफ्तार करने मे कामयाब रही। गिरफ्तार आरोपी ने फर्जी वाहन नंबर पर बनवाया फास्टैग, ओवरलोड मोरंग लेकर टोल प्लाजा पार करने का खेल करते थे।।
विस्तार :
एसटीएफ के अनुसार, फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फास्टैग बनवाकर राष्ट्रीय राजमार्गों के विभिन्न टोल प्लाजा से ओवरलोड वाहनों को निकालने और ऑनलाइन चालान से बचने वाले गिरोह के खिलाफ एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में एसटीएफ ने गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरोह पर इस तरीके से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाने का आरोप है।
थाना सरोजनीनगर में दर्ज मुकदमा संख्या 119/2026 की विवेचना के दौरान एसटीएफ को फर्जी फास्टैग के जरिए ओवरलोड वाहनों को टोल प्लाजा से निकालने वाले गिरोह की जानकारी मिली। मामले की विवेचना अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ लखनऊ सत्यसेन के पर्यवेक्षण में निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा द्वारा की जा रही है।
जांच में सामने आया कि वाहन संख्या UP 32 ZN 8925 के पंजीकृत स्वामी रियाज और उसके भाई सिराज ने कथित तौर पर फर्जी वाहन नंबर MA 34 S 9455 के नाम से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फास्टैग बनवाया था। इसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर और कूटरचित आरसी का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, सिराज ने अपने परिचितों के माध्यम से सीतापुर के खैराबाद टोल प्लाजा के पास मौजूद फास्टैग एजेंट से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फास्टैग जारी कराया था। इसके बाद वाहन चालक मुनीश पुत्र अनीस अहमद निवासी वाकरगंज, थाना लहरपुर, जनपद सीतापुर को वाहन चलाने के लिए रखा गया।
पूछताछ में आरोपी मुनीश ने कथित तौर पर बताया कि उसे 1500 रुपये प्रति चक्कर के हिसाब से वाहन चलाने के पैसे मिलते थे। वाहन में ओवरलोड मोरंग ले जाते समय फर्जी फास्टैग को वाहन पर लगाने के बजाय अपने पास छिपाकर रखने और टोल प्लाजा पर जरूरत पड़ने पर हाथ से दिखाने के निर्देश दिए गए थे।
आरोप है कि फर्जी नंबर वाली टोल पर्ची को वाहन में रखा जाता था, ताकि रास्ते में चेकिंग होने पर उसे दिखाया जा सके। ऑनलाइन चालान होने की स्थिति में वह फर्जी वाहन नंबर के नाम पर होता और वास्तविक वाहन मालिक जुर्माने से बच जाता।
एसटीएफ के अनुसार, इसी तरीके से ओवरलोड खनिज पदार्थों की ढुलाई के दौरान फर्जी वाहन नंबर और फास्टैग का इस्तेमाल कर ऑनलाइन चालान से बचने का खेल चल रहा था, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा था।
अभिसूचना संकलन के बाद एसटीएफ ने आरोपी मुनीश को 20 सितंबर 2026 की रात करीब 9:15 बजे इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा, थाना मड़ियांव क्षेत्र, कमिश्नरेट लखनऊ से गिरफ्तार किया।
आरोपी के खिलाफ थाना सरोजनीनगर में धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तार अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद जिला कारागार भेज दिया गया है। मामले में आगे की विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है।