लखनऊ :
तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद साइबर ठगी का हुआ शिकार,खाते से उड़े 1.28 लाख।।
दो टूक : लखनऊ पुलिस के द्वारा साइबर अपराध से बचाव को लेकर लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद साइबर ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं इसकी बनागी पीजीआई थाना क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने एक महिला के बैंक खाते से अलग-अलग तारीखों में ₹1,28,499 की रकम धोखाधड़ी पूर्वक निकाल ली। पीड़ित परिवार को बैंक स्टेटमेंट देखने के बाद रकम निकाले जाने की जानकारी हुई और साइबर क्राइम सेल समे स्थानीय थाने मे तहरीर देकर शिकायत की है।
विस्तार :
पीजीआई थाना क्षेत्र के साउथ सिटी, रायबरेली रोड निवासी मकसूद अली खान ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी पत्नी रुकईया बानो का पंजाब नेशनल बैंक, रायबरेली रोड शाखा में बचत खाता है। आरोप है कि 1 से 3 अगस्त 2026 के बीच अज्ञात साइबर अपराधियों ने खाते से चार अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल ₹1,28,499 निकाल लिए।
तहरीर के मुताबिक 1 अगस्त को ₹49,999, 2 अगस्त को ₹40,000 और ₹5,500 तथा 3 अगस्त को ₹33,000 खाते से ट्रांसफर किए गए। रकम अलग-अलग लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई। पीड़ित का कहना है कि इनमें से किसी भी लेनदेन की उन्होंने अनुमति नहीं दी थी और न ही किसी व्यक्ति के साथ OTP अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा की थी।
ठगी के बाद फिर आया साइबर विभाग के नाम पर फोन।
पीड़ित के मुताबिक घटना के कुछ दिन बाद 6 अगस्त को सुबह करीब 11:23 बजे एक अज्ञात मोबाइल नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को साइबर विभाग से जुड़ा बताते हुए ठगी की रकम वापस दिलाने की बात कही। कॉल संदिग्ध लगने पर पीड़ित ने कोई बैंकिंग जानकारी साझा नहीं की।
पीड़ित ने पुलिस से खाते से हुए सभी संदिग्ध लेनदेन, UTR नंबरों और फोन करने वाले व्यक्ति के मोबाइल नंबर की जांच कर वास्तविक आरोपियों की पहचान करने तथा ₹1,28,499 की धनराशि वापस दिलाने की मांग की है।
पीजीआई इस्पेक्टर सुनील सिंह ने बताया कि साइबर ठगी से बचने के लिए किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, पासवर्ड, CVV या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी न दें। बैंक या पुलिस अधिकारी बनकर फोन करने वाले संदिग्ध लोगों से सावधान रहें और किसी भी अनधिकृत लेनदेन की जानकारी मिलते ही तत्काल बैंक तथा साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
