गौतमबुद्धनगर: शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती पर डॉ. महिपाल सिंह को मिला ‘यूथ आइकॉन–शौर्य समर्पण’ सम्मान!!
दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास, समावेशी शिक्षा और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान के लिए किया गया सम्मानित
दो टूक//नोएडा। शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर समाजसेवा और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. महिपाल सिंह को प्रतिष्ठित ‘6वें यूथ आइकॉन–शौर्य समर्पण’ सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाज के प्रति निरंतर समर्पण और विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन युवा क्रांति सेना और गौरी शिक्षा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अग्रसेन भवन में किया गया। समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। शहीद भगत सिंह के विचारों, उनके साहस, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को याद करते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।
डॉ. महिपाल सिंह लंबे समय से फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के माध्यम से दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, समावेशी शिक्षा और उनके आत्मनिर्भर भविष्य के लिए कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने की दिशा में भी उनका योगदान लगातार जारी है।
आयोजकों के अनुसार, ‘यूथ आइकॉन–शौर्य समर्पण’ सम्मान ऐसे युवा नेतृत्वकर्ताओं और समाजसेवियों को प्रदान किया जाता है, जो अपने कार्यों के माध्यम से शहीद भगत सिंह के साहस, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना को आगे बढ़ा रहे हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि देश के उन सभी युवाओं का है जो राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए कुछ करने का संकल्प रखते हैं। उन्होंने कहा कि वे इस सम्मान को भारत के युवाओं को समर्पित करते हैं और भविष्य में भी समाज के जरूरतमंद वर्ग, विशेषकर दिव्यांग बच्चों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहेंगे।
समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने डॉ. महिपाल सिंह के सामाजिक एवं पुनर्वास क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम ने युवाओं में सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।
