लखनऊ :
STF-वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में वन्यजीव तस्करी की आड़ में ठगी करने वाले गिरोह के तीन शातिर गिरफ्तार।।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से टाइगर के नाखून व मॉनिटर लिजर्ड के अंग बरामद।
दो टूक : उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के नाम पर लोगों को फंसाकर ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र स्थित स्वास्तिक होम स्टे से गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मॉनिटर लिजर्ड (गोह) के 14 अंग, टाइगर के दो नाखून, 1.58 लाख रुपये नकद, वन अधिकारी के दो फर्जी पहचान पत्र और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रभात चतुर्वेदी निवासी शहडोल (मध्य प्रदेश), गिरधारी मौर्य निवासी गोरखपुर तथा संजीव कुमार सिंह निवासी बस्ती के रूप में हुई है।
◆विस्तार :
ऐसे रचते थे ठगी का पूरा खेल--- एसटीएफ के अनुसार, पिछले काफी समय से प्रतिबंधित वन्यजीवों की तस्करी की सूचना मिल रही थी। इसी दौरान वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के माध्यम से सूचना मिली कि प्रभात चतुर्वेदी नाम का व्यक्ति वाराणसी में वन्यजीव अंगों की तस्करी करने वालों को पकड़वाने का दावा कर रहा है।
सूचना के आधार पर एसटीएफ और वन विभाग की टीम फरीदपुर अंडरपास के पास पहुंची, जहां प्रभात चतुर्वेदी मिला। उसकी निशानदेही पर स्वास्तिक होम स्टे के कमरे से मॉनिटर लिजर्ड के अंग और टाइगर के नाखून बरामद किए गए। हालांकि मौके पर मौजूद वन विभाग के अधिकारियों को पूरा मामला संदिग्ध लगा, जिसके बाद गहन पूछताछ में ठगी का पूरा नेटवर्क सामने आ गया।
●पुराने सिक्कों के नाम पर बनाते थे शिकार।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह पहले नकली एंटीक (पुराने) सिक्के तैयार करता था। इसके बाद ऐसे लोगों को तलाशा जाता था जिन्हें आसानी से लालच दिया जा सके। उन्हें बताया जाता था कि इन दुर्लभ सिक्कों को खरीदकर बेचने पर पैसा कई गुना बढ़ जाएगा।
जब कोई व्यक्ति रुपये लेकर तय स्थान पर पहुंचता था, तब गिरोह के कुछ सदस्य पैसे लेकर फरार हो जाते थे। वहीं, पहले से छिपाकर रखे गए प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों के आधार पर यही गिरोह स्वयं WCCB, पुलिस और वन विभाग को सूचना देकर छापा पड़वा देता था, ताकि पीड़ित व्यक्ति ही वन्यजीव तस्करी के मामले में फंस जाए और गिरोह आसानी से रकम लेकर निकल जाए।
◆पांच लाख रुपये लेकर पहुंचा था पीड़ित।
जांच में सामने आया कि इसी साजिश के तहत चोलापुर निवासी नीरज कुमार मौर्य को झांसे में लिया गया। उसने अपने परिचित अभिषेक दुबे से पांच लाख रुपये लेकर गिरोह के बताए स्थान पर पहुंचा। वहां गिरोह के सदस्य दीनानाथ यादव और दीपक रुपये लेकर यह कहकर फरार हो गए कि पुराने सिक्के लेकर पार्टी आ रही है। इसके बाद पहले से तय योजना के तहत एसटीएफ और वन विभाग को सूचना देकर छापा डलवाया गया।
लेकिन संयुक्त टीम को पूरा मामला संदिग्ध लगा। पूछताछ में नीरज मौर्य ने पूरी सच्चाई बता दी, जिसके बाद गिरोह के सरगना प्रभात चतुर्वेदी को बुलाकर पूछताछ की गई। उसने पूरा षड्यंत्र स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर ठगी में मिले 1.58 लाख रुपये भी बरामद कर लिए गए।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
एसटीएफ के अनुसार, इस गिरोह में दीनानाथ यादव (गाजीपुर), दीपक (पटना, बिहार) और संतोष (बिहार) भी शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
●मुकदमा दर्ज - ---
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना सारनाथ, पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी में बीएनएस की धाराओं 318(4), 319(2), 338, 336(3) तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
