मंगलवार, 18 अगस्त 2026

लखनऊ : पूर्व IPS ने UP में पुलिस फायरिंग पर FIR की मांग,दिया हवाला।||Lucknow: Former IPS officer demands FIR over police firing in UP, cites...||

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लखनऊ : 
पूर्व IPS ने UP में पुलिस फायरिंग पर FIR की मांग,दिया हवाला।।
10 साल के मामलों की जांच CBCID से कराने की उठी आवाज।
दो टूक : उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग की घटनाओं को लेकर एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने सवाल खड़ा करते हुए दस सालो के पुलिस फायरिंग पर एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग किया है। इनका लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।।
विस्तार :
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर एवं
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को पत्र भेजकर मांग की है कि पिछले दस वर्षों में पुलिस फायरिंग से किसी व्यक्ति की मौत या चोट की हर घटना में अनिवार्य रूप से FIR दर्ज की जाए और जांच CBCID से कराई जाए।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर का आरोप है कि पुलिस अक्सर किसी व्यक्ति के पहले गोली चलाने का दावा करते हुए घटना को आत्मरक्षा या मुठभेड़ का रूप देती है और FIR भी उसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कर दी जाती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में पुलिस स्वयं घटना में फायरिंग करने वाला पक्ष होती है और घटना से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख व साक्ष्य भी उसी के नियंत्रण में रहते हैं।
पुलिस की गोली वैध थी या नहीं, जांच के बाद तय हो”
पूर्व आईपीएस अमिताभ ने कहा कि किसी पुलिसकर्मी की फायरिंग कानूनन सही थी या नहीं, इसका फैसला पुलिस के शुरुआती बयान के आधार पर नहीं बल्कि FIR और निष्पक्ष विवेचना के बाद होना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में 2017 के सुमित गुर्जर, 2018 के जितेन्द्र यादव व इरशाद अहमद तथा 2021 के जीशान हैदर सहित विभिन्न मामलों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में बाद में मानवाधिकार आयोग अथवा न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या पुलिस फायरिंग की हर घटना की शुरुआत से ही स्वतंत्र जांच नहीं होनी चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला
अमिताभ ठाकुर ने NHRC से सुप्रीम कोर्ट के PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2014) 10 SCC 635 में दिए गए दिशा-निर्देशों के आलोक में उत्तर प्रदेश में पिछले दस वर्षों की ऐसी सभी घटनाओं में अनिवार्य FIR दर्ज कराने की मांग की है।
साथ ही उन्होंने भविष्य में इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू किए जाने की मांग उठाई है।
अब सवाल सिर्फ एक FIR का नहीं, बल्कि पुलिस की गोली से हुई हर मौत और हर चोट की निष्पक्ष जांच का है। NHRC इस मांग पर क्या कदम उठाता है, यह आने वाले समय में पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों की जांच और जवाबदेही की दिशा तय कर सकता है।