गुरुवार, 13 अगस्त 2026

मऊ :कोर्ट के आदेश पर भाजपा जिलाध्यक्ष पर FIR दर्ज,पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।||Mau:An FIR has been filed against the BJP District President on court orders, raising questions about the police's performance.||

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मऊ :
कोर्ट के आदेश पर भाजपा जिलाध्यक्ष पर FIR दर्ज,पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : प्रधानी चुनाव की रंजिश में घर में घुसकर मारपीट और धमकी देने का आरोप, थाने से कार्रवाई न होने पर कोर्ट की शरण ली थी।
विस्तार :
मऊ जनपद के थाना हलधरपुर क्षेत्र मे प्रधानी चुनाव की रंजिश में घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज, कपड़े फाड़ने और जान से मरवाने की धमकी देने के आरोप में न्यायालय ने हलधरपुर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। रतनपुरा गांव निवासी अजीत सिंह की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर न्यायिक मजिस्ट्रेट, मऊ ने 12 अगस्त 2026 को थानाध्यक्ष हलधरपुर को अभियोग पंजीकृत करने का आदेश दिया।
शिकायतकर्ता अजीत सिंह का आरोप है कि गांव के रामाश्रय मौर्य से प्रधानी चुनाव को लेकर पुरानी रंजिश चल रही है। आरोप है कि 7 जुलाई की सुबह रामाश्रय मौर्य तीन अज्ञात लोगों के साथ उनके घर के सामने पहुंचे और विवाद के बाद घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की। शिकायत के मुताबिक इस दौरान उनकी शर्ट भी फाड़ दी गई। शोर सुनकर खुश्बू सिंह, इन्द्र कुमार सिंह और अर्जुन सिंह मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव कराया।
आरोप है कि जाते समय आरोपितों ने अजीत सिंह और उनके परिवार को जान से मरवाने तथा फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। अजीत सिंह का कहना है कि घटना की सूचना हलधरपुर पुलिस को देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक को भी रजिस्ट्री के जरिए शिकायत भेजी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
●एक मामले में तेजी, तो आम फरियादियों को कब मिलेगी ऐसी सुविधा।।
इसी बीच इस प्रकरण ने मऊ पुलिस की कार्यशैली को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हाल में भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर दर्ज मुकदमे में पुलिस द्वारा तेजी से जांच और कार्रवाई किए जाने की चर्चा के बीच अब आम फरियादियों की ओर से भी ऐसी ही तत्परता की मांग उठ रही है।
सवाल यह है कि अगर प्रभावशाली और चर्चित मामलों में पुलिस तेजी से जांच पूरी कर सकती है, तो गरीब, कमजोर और आम नागरिकों की शिकायतों पर वही गति क्यों नहीं दिखाई देती? वर्षों तक जांच और मुकदमों में उलझे रहने वाले परिवारों को थाने से लेकर न्यायालय तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
कानून की नजर में हर नागरिक समान है। ऐसे में पुलिस की सक्रियता किसी व्यक्ति की हैसियत देखकर नहीं, बल्कि मामले की गंभीरता और कानून के आधार पर दिखाई देनी चाहिए। अब देखने वाली बात होगी कि न्यायालय के आदेश के बाद थाना हलधरपुर पुलिस इस मामले में कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता से कार्रवाई करती है ।
मऊ अपर पुलिस अधीक्षक अनुपम कुमार की बाईट--