गौतमबुद्धनगर: ड्यूटी के दौरान सोती मिली महिला डॉक्टर, जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल!!
दो टूक//नोएडा। उत्तर प्रदेश की शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर सामने आने के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे, जबकि एक महिला डॉक्टर के ड्यूटी के दौरान कमरे में सोने का वीडियो सामने आया है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज इलाज के लिए कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर के कमरे में सोने का वीडियो सामने आया। वीडियो में डॉक्टर के आराम करते नजर आने के दावे के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
नोएडा जैसे अत्याधुनिक शहर में बड़ी संख्या में लोग बेहतर और सुलभ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में यदि ओपीडी के दौरान चिकित्सक मरीजों को समय पर देखने के बजाय कमरे में आराम करते पाए जाते हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मरीजों की लंबी कतार और अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों के बीच ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक की निगरानी कौन कर रहा है?
सीएमएस डॉ. अशोक कुमार झा की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
वीडियो सामने आने के बाद जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. अशोक कुमार झा की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति, ओपीडी संचालन और मरीजों को निर्धारित समय पर उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान डॉक्टर के सोने की तस्वीर सामने आना अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सीएमओ की भूमिका पर भी उठे सवाल, जांच और कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी की भूमिका और जिला अस्पताल की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य इकाई में इस तरह की तस्वीर सामने आने पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है।
हालांकि, महिला डॉक्टर के वीडियो की परिस्थितियों और उसके ड्यूटी के दौरान बनाए जाने की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की सत्यता की जांच भी आवश्यक है।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जिला अस्पताल प्रशासन से जवाब-तलब कर जिम्मेदारी तय की जाती है। नोएडा के हजारों मरीजों के लिए यह सवाल अहम है कि सरकारी अस्पताल में उन्हें समय पर इलाज और डॉक्टरों की उपलब्धता कब सुनिश्चित होगी।।
