गौतमबुद्धनगर:फर्जी एविएशन जॉब और एडमिशन रैकेट का पर्दाफाश, साइबर क्राइम पुलिस ने वांछित डॉक्टर को गाजियाबाद से दबोचा!!
दो टूक//नोएडा। नौकरी और एडमिशन के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले फर्जी एविएशन जॉब एवं एडमिशन रैकेट के खिलाफ गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण और अभिसूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए रैकेट के एक वांछित अभियुक्त डॉक्टर अजय पुत्र धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। इस मामले में पुलिस पहले ही गैंग के पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
फर्जी संस्थान की आड़ में चल रहा था साइबर ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपी गिरोह ने सेक्टर-22, नोएडा स्थित LAMBODAR INSTITUTE के नाम से फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रखा था। गिरोह के सदस्य प्रतिष्ठित एविएशन कंपनियों और प्रशिक्षण संस्थानों में नौकरी दिलाने तथा एडमिशन कराने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं और अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाते थे।
आरोपी अलग-अलग चरणों में ऑनलाइन इंटरव्यू, रजिस्ट्रेशन, एडमिशन, ट्रेनिंग, मेडिकल, यूनिफॉर्म, सिक्योरिटी डिपॉजिट और प्रोसेसिंग फीस सहित विभिन्न मदों के नाम पर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन रकम जमा कराते थे।
एयरलाइंस के नाम पर भेजते थे फर्जी ऑफर लेटर
गिरोह के सदस्य खुद को विभिन्न एविएशन संस्थानों और एयरलाइंस का प्रतिनिधि बताकर अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। भरोसा कायम करने के लिए उन्हें फर्जी ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन, प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज भेजे जाते थे। दस्तावेजों को देखकर अभ्यर्थी उन्हें वास्तविक मान लेते थे और गिरोह के बताए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने Noida International Airport के नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इसके अलावा विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर उनकी विश्वसनीयता का झूठा माहौल बनाया जाता था।
म्यूल बैंक खातों में मंगाई जाती थी ठगी की रकम
साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न म्यूल बैंक खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद आरोपी रकम को आपस में बांट लेते थे। इस तरह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से बेरोजगार युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों को अपना निशाना बनाकर ठगी कर रहा था।
पहले पांच आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 08 जुलाई 2026 को गैंग के पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब वांछित अभियुक्त डॉक्टर अजय की गिरफ्तारी से मामले की जांच को आगे बढ़ाने में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
इस धारा में दर्ज है मुकदमा
इस संबंध में थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में मु0अ0सं0-205/2026, धारा 318(4), 319(2), 238(C), 61(2) बीएनएस एवं धारा 66C/66D आईटी एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत है।
नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से रहें सावधान
साइबर क्राइम पुलिस ने युवाओं और अभ्यर्थियों से अपील की है कि नौकरी या एडमिशन के नाम पर किसी भी कंपनी अथवा संस्थान को रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या ट्रेनिंग फीस देने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट और प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें।
पुलिस ने कहा है कि केवल आधिकारिक वेबसाइट, सत्यापित ई-मेल और अधिकृत संपर्क माध्यमों से ही नौकरी या एडमिशन के लिए आवेदन करें। किसी अनजान कॉल, सोशल मीडिया विज्ञापन या फर्जी वेबसाइट पर भरोसा न करें।
यदि कोई संस्था बिना उचित चयन प्रक्रिया के तत्काल ऑफर लेटर भेजकर पैसे जमा कराने का दबाव बनाती है, तो अभ्यर्थियों को सतर्क हो जाना चाहिए। किसी भी संदिग्ध नौकरी, एडमिशन अथवा ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि साइबर ठग नौकरी और करियर का सपना दिखाकर युवाओं को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी ऑफर लेटर, प्रमाण-पत्र या कंपनी के लोगो को देखकर भरोसा करने के बजाय संबंधित कंपनी या संस्थान से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना बेहद जरूरी है।।
