सोमवार, 17 अगस्त 2026

गौतमबुद्धनगर: प्राधिकरण के आश्वासन के बाद किसानों की गिरफ्तारी से भड़का आक्रोश, बीसी प्रधान बोले—दमन से नहीं दबेगा किसान आंदोलन!!

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गौतमबुद्धनगर: प्राधिकरण के आश्वासन के बाद किसानों की गिरफ्तारी से भड़का आक्रोश, बीसी प्रधान बोले—दमन से नहीं दबेगा किसान आंदोलन!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा/ग्रेटर नोएडा, 17 अगस्त 2026।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर महापंचायत में शामिल होने जा रहे किसानों की गिरफ्तारी को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा आक्रोश जताया है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने किसानों की गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सभी गिरफ्तार किसानों को तत्काल बिना शर्त रिहा करने की मांग की है।

चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि गौतमबुद्धनगर के किसान लंबे समय से अपनी जमीन के उचित मुआवजे, 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट, रोजगार, विस्थापन पैकेज सहित अन्य जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। किसानों ने हमेशा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया है, लेकिन इसके बावजूद किसानों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले जब किसान अपनी मांगों को लेकर प्राधिकरण पहुंचे थे, तब प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने किसानों के साथ वार्ता कर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था। अधिकारियों के आश्वासन पर किसान वापस लौट गए थे। बीसी प्रधान के अनुसार, इसके बाद न तो किसानों के साथ कोई सार्थक बैठक हुई और न ही लंबित मांगों के समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई की गई।

आश्वासन के बाद महापंचायत का किया गया था ऐलान

चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि पिछली वार्ता में मिले आश्वासन के आधार पर ही किसानों ने प्राधिकरण पर महापंचायत का ऐलान किया था। किसानों का उद्देश्य अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से अधिकारियों के समक्ष रखना था, लेकिन महापंचायत में पहुंचने से पहले ही किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की इस कार्रवाई से किसानों में गहरा रोष है और ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

बीसी प्रधान ने कहा कि किसान किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि अपनी जमीन और भविष्य से जुड़े अधिकारों की मांग कर रहे हैं। जमीन अधिग्रहण के बाद किसान के सामने रोजगार, आवास और परिवार के भविष्य की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे में किसानों की मांगों को गंभीरता से सुनकर उनका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होकर अपनी बात रखने का अधिकार देता है। ऐसे में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे किसानों की गिरफ्तारी गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसानों की आवाज को दबाने के बजाय उनके प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर सभी लंबित मुद्दों का समाधान निकाला जाए।

चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए और भविष्य में शांतिपूर्ण किसान आंदोलनों को बलपूर्वक रोकने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाए।


बीसी प्रधान ने रखीं प्रमुख मांगें

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने प्रशासन के सामने किसानों की प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि सभी गिरफ्तार किसानों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए। प्राधिकरण पिछली वार्ता में उठाए गए सभी लंबित मुद्दों का समयबद्ध तरीके से समाधान करे। किसानों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कर अनावश्यक मुकदमे वापस लिए जाएं और किसानों के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया और दमन की नीति जारी रखी, तो किसान आंदोलन को और व्यापक स्तर पर मजबूत किया जाएगा।

चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि किसानों की आवाज को गिरफ्तारियों, मुकदमों या दबाव के जरिए नहीं दबाया जा सकता। किसान अपनी जमीन, अपने अधिकार और अपने बच्चों के भविष्य की लड़ाई लड़ रहा है और जब तक उनकी जायज मांगों का सम्मानजनक समाधान नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।।