गौतमबुद्धनगर: राखी के धागे में बंधा आत्मिक शक्ति और प्रेम का संदेश, राजयोग ध्यान से मिली आंतरिक शांति!!
दो टूक//नोएडा, 23 अगस्त। रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार भाई-बहन के स्नेह और प्रेम की परंपरा से आगे बढ़कर आत्मिक शक्ति, शांति, संस्कार और श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों का संदेश देता नजर आया। ब्रह्माकुमारीज, सेक्टर-51 नोएडा की ओर से गार्डेनिया ग्लोरी, सेक्टर-46 स्थित क्लब हाउस में ‘स्नेह मिलन एवं ध्यान सत्र’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर आध्यात्मिक चिंतन, राजयोग ध्यान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए पंकज माथुर ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ने, रिश्तों में प्रेम बढ़ाने और जीवन में श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में इंसान ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन इस दौड़ में वह स्वयं से दूर होता जा रहा है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य लोगों को कुछ समय अपने लिए निकालकर आत्मचिंतन करने और भीतर की शांति से जुड़ने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम की शुरुआत आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुई। डॉ. सुचित्रा ने मधुर आध्यात्मिक गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भावपूर्ण और भक्तिमय बना दिया। इसके बाद मुख्य वक्ता बीके फाल्गुनी ने प्रेम, अहंकार और आत्मिक संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार बदलने का प्रयास नहीं करता, बल्कि उसे स्वीकार करने की भावना सिखाता है। उन्होंने कहा कि जब तक जीवन में ‘मैं’ अर्थात अहंकार हावी रहेगा, तब तक प्रेम की वास्तविक अनुभूति अधूरी रहेगी।
उन्होंने लोगों को आपसी संबंधों में अपेक्षाओं और अहंकार को कम कर प्रेम, सम्मान और स्वीकार्यता को स्थान देने का संदेश दिया। उनका कहना था कि आध्यात्मिक शक्ति व्यक्ति को परिस्थितियों के बीच भी संतुलित और सकारात्मक बने रहने की क्षमता प्रदान करती है।
इसके बाद बीके लीना के निर्देशन में राजयोग ध्यान सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मन लगातार तनाव और शोर से घिरा रहता है। ऐसे में कुछ समय स्वयं के भीतर जाकर उस शांत स्वरूप से जुड़ना आवश्यक है, जो हर व्यक्ति के अंदर मौजूद है। राजयोग ध्यान के माध्यम से उपस्थित लोगों ने कुछ समय के लिए मानसिक स्थिरता और आंतरिक शांति का अनुभव किया।
कार्यक्रम में बच्चों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति और युवतियों द्वारा प्रस्तुत सामाजिक संदेश पर आधारित स्किट ने भी खूब तालियां बटोरीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का रंग भर दिया।
रक्षाबंधन के अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने उपस्थित लोगों को राखी बांधी। खास बात यह रही कि राखी बांधने की परंपरा को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित न रखते हुए बहनों और बुजुर्गों को भी शुभकामनाएं दी गईं। इस पहल के माध्यम से प्रेम, सम्मान, आत्मिक सुरक्षा और सर्वकल्याण की भावना का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में डॉ. आलोक वर्मा ने भी लोगों को जीवन में अच्छे संस्कारों और श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज को मजबूत बनाने के लिए बच्चों और युवाओं में संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता तथा सकारात्मक सोच विकसित करना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों के लिए सात्विक भोजन एवं प्रसाद की व्यवस्था की गई। आयोजकों ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए नियमित रूप से राजयोग ध्यान करने और जीवन में सकारात्मकता, शांति, प्रेम तथा श्रेष्ठ संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम ने रक्षाबंधन के पर्व को भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़ाकर आत्मिक शक्ति, मानवता, प्रेम और सामाजिक सद्भाव का पर्व बनाने का संदेश दिया।।
