गोण्डा।
विभिन्न मांगों को लेकर उप्र के अनेक जनपदों सहित गोण्डा जिले में पैरावेट/पशु मित्रो की हड़ताल इन दिनों जारी है। ऐसे में पशुओ का खुरपका- मुंहपका टीकाकरण अभियान बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इस वजह से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। इस हड़ताल की वजह से इटियाथोक ब्लाक क्षेत्र में पशुओ का खुरपका- मुंहपका टीकाकरण अभियान प्रभावित चल रहा है।पशुपालन विभाग द्वारा संचालित खुरपका- मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान पर इन कर्मियों के हड़ताल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। स्थानीय पशु टीकाकर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अभियान का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है।
गैरतलब है कि अपने विभिन्न मांगों को लेकर कर्मियों ने हाल में ही जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में जिलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांगो के जल्द पूर्ण किये जाने का आग्रह किया था। उनके इन मांगों की तरफ अब तक कोई ध्यान नही दिया गया है। ऐसे में खफा कर्मियों ने टीकाकरण अभियान का वहिष्कार कर दिया है और उन्होंने टीकाकरण कार्य से अलग रहने की घोषणा की है।
बताते चले कि इटियाथोक ब्लाक मुख्यालय पर राजकीय पशु अस्पताल में वर्तमान समय मे महज तीन अदद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्थाई रूप से तैनात है। यहां पर करीब एक दर्जन पैरावेट है जो पशुओ का टीकाकरण व अन्य कार्य करते है। अब इन सभी पैरावेट के हड़ताल से टीकाकरण का कार्य यहां बुरी तरह से प्रभावित चल रहा है।
टीकाकर्मियों के कार्य बहिष्कार के कारण क्षेत्र में पशुओ के टीकाकरण अभियान की गति काफी धीमी पड़ गई है और पशुपालक अपने पशुओ के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित है।
इटियाथोक के प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डा0 निशांत यादव ने बताया कि यह अभियान बीते 22 जुलाई से आगामी 8 सितंबर तक चलना है। हमे टीकों की खुराक उपलब्ध कराई गई है, पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य भी निर्धारित है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में तैनात तीन स्थाई/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सहयोग से मध्यम गति से टीकाकरण का कार्य किसी तरह से चल रहा है। अब तक करीब एक दर्जन ग्राम पंचायतों में यह कार्य हो पाया है। उन्होंने कहा कि कर्मियों के हड़ताल से टीकाकरण की रफ्तार काफी धीमी है, जिसे समय से पूर्ण करने के प्रयास जारी है। इस अभियान के तहत गाय व भैंस को टीका लगाया जा रहा है। कर्मियों के कार्य बहिष्कार के कारण निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप टीकाकरण नहीं हो पा रहा है।
उधर दूसरी तरफ टीकाकरण अभियान की धीमी रफ्तार से क्षेत्र के पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि खुरपका- मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारी से पशुओं की सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार और विभाग से टीकाकर्मियों की मांगों का शीघ्र समाधान कर अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने की मांग की है।
-यह हैं हड़ताली कर्मियों की मांगें----
1. पैरामवेट / पशुमित्र / मैत्री को 15000 रु से 25000 रु प्रतिमाह निश्चित मानेदय दिया जाए।
2. 10, 20, 25 वर्ष से कार्यरत साथियों का सेवाकाल में स्थायीकरण हो।
3. स्वास्थ्य बीमा एवं दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाए।
4. टीकाकरण का बकाया भुगतान/कृत्रिम गर्भाधान व गर्भ परीक्षण तथा उत्पन्नसन्तति एवं पशुगणना का बकाया पिछला भुगतान जल्द हो।
5. एफएमडी टीकाकरण एवं अन्य विभागीय कार्यों का अलग से प्रोत्साहन रकम दिया जाए।
6. कार्य हेतु किट, यात्रा भत्ता उपलब्ध कराया जाय।
