बुधवार, 19 अगस्त 2026

लखनऊ : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 42.09 लाख की साइबर ठगी, 13.83 लाख फ्रीज।|Lucknow: Cyber ​​fraud of Rs 42.09 lakh in the name of digital arrest, Rs 13.83 lakh frozen.||

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लखनऊ : 
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 42.09 लाख की साइबर ठगी, 13.83 लाख फ्रीज।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर जमील अब्बास जमाली से 42 लाख 9 हजार 869 रुपये की ठगी कर डाली। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, उन पर कार्रवाई शुरू कर दी। अब तक 13 लाख 83 हजार 735 रुपये फ्रीज/होल्ड कराए जा चुके हैं।
विस्तार :
ADCP क्राइम किरन यादव के अनुसार लखनऊ के थाना साइबर क्राइम में दर्ज मुकदमा संख्या 89/2026 में पुलिस की जांच के दौरान सामने आया कि साइबर ठगों ने पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर अलग-अलग माध्यमों से कुल ₹42,09,869 की रकम ट्रांसफर करा ली। मामले में धारा 318(4), 319(2), 351(4) बीएनएस एवं 66D आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
छह बैंक खातों में पहुंची ठगी की रकम।
विवेचना में पता चला कि ठगों ने रकम को कुल छह बैंक खातों में स्थानांतरित कराया था। पुलिस टीम ने तत्काल संबंधित बैंकों से संपर्क कर खातों पर कार्रवाई कराई। अभी तक दो खातों का विवरण प्राप्त होने के बाद पुलिस ₹13,83,735 की धनराशि फ्रीज/होल्ड कराने में सफल रही है। बाकी खातों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।
असम, गुजरात और कर्नाटक से जुड़े मोबाइल नंबर।
जांच में ठगी में इस्तेमाल अथवा शामिल पाए गए छह मोबाइल नंबरों की तकनीकी पड़ताल की गई। ये नंबर अलग-अलग राज्यों, जिनमें असम, गुजरात और कर्नाटक शामिल हैं, से संबंधित पाए गए हैं। वहीं WhatsApp से मिले तकनीकी विवरण और IP एड्रेस के विश्लेषण में कंबोडिया, यूएई और चीन समेत विभिन्न देशों की लोकेशन सामने आई है।
पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की कड़ियां जोड़कर ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका तय करने में जुटी है। शेष बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं।
साइबर पुलिस की दो टूक अपील: डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तत्काल कॉल काटें और किसी भी हालत में बैंकिंग अथवा व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
संदिग्ध साइबर कॉल या वीडियो कॉल की स्थिति में तत्काल 1930 पर शिकायत करें और cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस ने लोगों से खुद जागरूक रहने के साथ-साथ परिवार और आसपास के लोगों को भी डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के प्रति जागरूक करने की अपील की है।