गौतमबुद्धनगर: जीएसटी अधिकारी बनकर 29 लाख की ठगी, पांच आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने पूरी रकम की बरामद!!
दो टूक//नोएडा। थाना बिसरख पुलिस ने जीएसटी अधिकारी बनकर एक जीएसटी कंसल्टेंट को फर्जी ई-वे बिल सत्यापन के नाम पर ब्लैकमेल कर 29 लाख रुपये हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर 29 लाख रुपये की शत-प्रतिशत बरामदगी की है। बरामद रकम में 24.50 लाख रुपये नकद तथा 4.50 लाख रुपये से खरीदी गई सोने की चेन, चांदी का कड़ा और अंगूठी शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताकर पीड़ित की कार को रोक लिया था। इसके बाद दो फर्मों/कंपनियों के फर्जी ई-वे बिल और सत्यापन से जुड़े मामले में कार्रवाई का डर दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया गया। आरोपियों ने जीएसटी के मुकदमे में जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ित से 29 लाख रुपये वसूल लिए थे।
एस एस्पायर सोसायटी के पास रोककर कार में बैठ गए थे आरोपी
घटना 20 जुलाई 2026 की बताई गई है। जीएसटी कंसल्टेंट अपने पालतू डॉग और लैपटॉप के साथ कार से घर से निकला था। एस एस्पायर सोसायटी के पास कार सवार आरोपियों ने उसकी कार के आगे अपनी गाड़ी लगाकर उसे रोक लिया। इसके बाद आरोपियों में से एक ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए पीड़ित की कार में प्रवेश किया और दो फर्मों/कंपनियों का नाम लेकर उनके फर्जी ई-वे बिल के सत्यापन के नाम पर कार्रवाई का भय दिखाया।
आरोपियों ने पीड़ित को उसकी ही कार में घुमाते हुए ब्लैकमेल किया और जीएसटी के मामले में जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद उसके फोन से पैसे मंगवाए गए। जब पीड़ित का भाई 29 लाख रुपये नकद लेकर पहुंचा तो आरोपी रकम लेकर उसे उसकी कार समेत छोड़कर अपनी गाड़ी से फरार हो गए।
सीसीटीवी और सर्विलांस से खुला पूरा राज
घटना के बाद थाना बिसरख पुलिस ने सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटना का सफल अनावरण करते हुए जलपुरा रोड स्थित इस्कॉन मंदिर के पास से कशिश चौहान उर्फ ईशू समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 24 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए। इसके अलावा 4 लाख 50 हजार रुपये से खरीदी गई सोने की चेन, चांदी का कड़ा और अंगूठी भी बरामद की गई। इस तरह पुलिस ने घटना में हड़पी गई पूरी 29 लाख रुपये की रकम की शत-प्रतिशत बरामदगी कर ली।
पुलिस की वर्दी और दो कारें भी बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल की गई दो कारें, सात मोबाइल फोन, पुलिस सब इंस्पेक्टर की एक जोड़ी वर्दी तथा दिल्ली सिविल डिफेंस के लोगो वाली वर्दी, डोरी और बेल्ट भी बरामद किए हैं। घटना में इस्तेमाल की गई कारों में एक एक्सएल-6 (UP 16 CU 3023) तथा एक बिना नंबर प्लेट की वेन्यू कार शामिल है।
2021 से थी मुख्य आरोपी और पीड़ित की पहचान
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि मुख्य आरोपी कशिश उर्फ ईशू चौहान और पीड़ित पहले से एक-दूसरे को जानते थे। पुलिस के अनुसार, जीएसटी कंसल्टेंट के रूप में काम करने के दौरान जीएसटी से संबंधित बिलों में कथित फर्जीवाड़े को लेकर विभाग द्वारा जारी नोटिस के निस्तारण के प्रयास के दौरान वर्ष 2021 से दोनों के बीच संपर्क था।
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसे पीड़ित की गतिविधियों और जीएसटी से जुड़े कामकाज की जानकारी थी। इसी जानकारी का फायदा उठाकर आरोपियों ने उससे मोटी रकम ऐंठने की योजना बनाई और घटना से पहले उसकी गतिविधियों की रेकी की।
कुत्ते को भी रास्ते में दूसरे साथी को सौंपा
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन आरोपियों ने पीड़ित की कार को रोकने के बाद उसके पालतू डॉग को एक्सप्रेसवे पर अपने साथी विवेक के हवाले कर दिया। इसके बाद पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहने कशिश उर्फ ईशू चौहान ने पीड़ित की कार चलाई, जबकि पीड़ित को पिछली सीट पर बैठाया गया। आरोपियों ने जीएसटी की धनराशि वसूलने और मुकदमे में जेल भेजने की धमकी देकर उसे डराया और उसके फोन से रकम मंगवाई।
गिरफ्तार आरोपियों में विभिन्न काम से जुड़े लोग
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू चौहान निवासी बिजनौर, हाल निवासी सलारपुर नोएडा, राजेश पवार निवासी दिल्ली, विवेक शर्मा निवासी मथुरा, अंकित शाही निवासी देवरिया और अंशुल निवासी एटा शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि कशिश चौहान यशोभूमि द्वारका, दिल्ली में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है। वहीं राजेश पवार दिल्ली सिविल डिफेंस से जुड़ा हुआ है। विवेक शर्मा एस्कोर्ट मानेसर, बल्लभगढ़ में डीसीपीओ के पद पर कार्यरत रहा है। अंकित सलारपुर में लोहे की ग्रिल और गेट बनाने का काम करता है तथा घटना में प्रयुक्त एक्सएल-6 वाहन का मालिक बताया गया है। अंशुल दिल्ली में प्रॉपर्टी का काम करता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि घटना में शामिल कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी नहीं है। आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।
बरामदगी
- 24 लाख 50 हजार रुपये नकद
- 4 लाख 50 हजार रुपये से खरीदी गई सोने की चेन, चांदी का कड़ा और अंगूठी
- घटना में प्रयुक्त दो कारें
- पुलिस सब इंस्पेक्टर की एक जोड़ी वर्दी
- दिल्ली सिविल डिफेंस के लोगो वाली वर्दी, डोरी और बेल्ट
- विभिन्न कंपनियों के सात मोबाइल फोन
पुलिस की इस कार्रवाई से फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को डराने-धमकाने और ब्लैकमेल कर रकम वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले में आरोपियों के आपराधिक इतिहास और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
