गौतमबुद्धनगर: 16वें महाकौथिग-2026 की नई कार्यकारिणी का गठन, इंदिरा चौधरी बनीं अध्यक्ष!!
दो टूक//नोएडा। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक माने जाने वाले 16वें महाकौथिग-2026 की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। आगामी आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए रविवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में महाकौथिग-2026 की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। इस बार आयोजन में मां सुरकंडा देवी के स्वरूप को विशेष रूप से मंच पर सुशोभित किया जाएगा, जो उत्तराखंड की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
बैठक में पदाधिकारियों ने महाकौथिग को भव्य, सुव्यवस्थित और पूरी तरह उत्तराखंड की संस्कृति एवं विरासत को समर्पित बनाने का संकल्प लिया। सर्वसम्मति से श्रीमती इंदिरा चौधरी को महाकौथिग-2026 का अध्यक्ष, आदित्य घिल्डियाल को चेयरमैन तथा हरीश असवाल को वाइस चेयरमैन चुना गया।
नई कार्यकारिणी में विभिन्न दायित्वों के लिए अनुभवी एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। राजेंद्र चौहान को मुख्य संयोजक, कल्पना चौहान को संयोजिका, केशव जोशी को उपाध्यक्ष, लक्ष्मण रावत को महासचिव और सुबोध थपलियाल को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
इसी क्रम में सीमा पंवार को सांस्कृतिक सचिव, शीला पंत को सह-सांस्कृतिक सचिव, राजेंद्र रावत को प्रशासनिक सचिव, आई.पी. उनियाल को प्रमुख व्यवस्थापक, देवेंद्र सिंह रावत को वरिष्ठ व्यवस्थापक, जगत सिंह रावत को वरिष्ठ सलाहकार तथा नरेंद्र सिंह को संरक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सुषमा जोशी को स्टॉल प्रभारी, रेखा चौहान को डायरेक्टर तथा रजनी ढौंडियाल जोशी और नीरज रावत को मीडिया प्रभारी बनाया गया है।
उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत का बनेगा भव्य मंच
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि महाकौथिग महज एक सांस्कृतिक मेला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, लोकपरंपराओं और विरासत को संरक्षित करने का एक व्यापक अभियान है। आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड के लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और पहाड़ी जीवनशैली को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजन में बच्चों और युवाओं को उत्तराखंड की बोली-भाषा, रीति-रिवाजों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। पदाधिकारियों का कहना है कि बदलते दौर में अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और महाकौथिग इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रवासी उत्तराखंडियों को संस्कृति से जोड़ने की पहल
कार्यकारिणी के सदस्यों ने कहा कि महाकौथिग के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों को भी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज को एकजुट करने का मजबूत माध्यम बनेगा।
आयोजन समिति ने उत्तराखंड समाज के सभी लोगों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और संस्कृति प्रेमियों से 16वें महाकौथिग-2026 को सफल बनाने के लिए सक्रिय सहभागिता और सहयोग की अपील की है।
महाकौथिग-2026 का संकल्प है—
“अपनी संस्कृति – अपनी पहचान,
अपनी विरासत – अपनी शान।”
