अम्बेडकर नगर :
लोअर पीसीएस के 150 से अधिक परीक्षार्थियों को नारायण फाउंडेशन ने उपलब्ध कराईं निःशुल्क सुविधाएं।।
।। देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : परीक्षार्थियों के लिए की गई यह पहल सिर्फ ठहरने और भोजन की व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूर-दराज से आए युवाओं को परीक्षा से पहले मानसिक सुकून और आत्मविश्वास देने का प्रयास भी साबित हुई। अम्बेडकरनगर में नारायण फाउंडेशन की यह पहल सामाजिक जिम्मेदारी और छात्र हित को लेकर एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में सामने आई है।
विस्तार:
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की लोअर पीसीएस परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों से अम्बेडकरनगर पहुंचे परीक्षार्थियों के लिए नारायण फाउंडेशन की ओर से की गई निःशुल्क व्यवस्थाओं की प्रदेशभर में सराहना हो रही है। फाउंडेशन के संरक्षक विवेक मौर्य के नेतृत्व में बाहरी जिलों से आए 150 से अधिक अभ्यर्थियों के ठहरने, भोजन, नाश्ते और परीक्षा केंद्र तक आवागमन की व्यवस्था निःशुल्क की गई।
परीक्षार्थियों के लिए यह व्यवस्था मौर्या स्टेट मैरिज लॉन, मौर्य नगर, पुन्थर, टांडा में की गई थी। परीक्षा की पूर्व संध्या पर पहुंचे अभ्यर्थियों का स्वागत कर उन्हें आरामदायक एसी कमरों में रात्रि विश्राम, भोजन और सुबह परीक्षा से पहले नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई गई। साथ ही परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की गई।
नारायण फाउंडेशन की इस पहल का लाभ दिल्ली, प्रयागराज, लखनऊ, जौनपुर, भदोही, गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी समेत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे परीक्षार्थियों ने उठाया। अभ्यर्थियों का कहना था कि दूसरे जिले में परीक्षा केंद्र पड़ने पर सबसे बड़ी चिंता ठहरने और भोजन की होती है। परीक्षा के समय होटल पहले से ही फुल हो जाते हैं, जिससे अभ्यर्थियों का तनाव बढ़ जाता है और उसका सीधा असर परीक्षा की तैयारी पर पड़ता है।
परीक्षार्थी बोले—यह मदद नहीं, हौसला है
प्रयागराज से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गोरखपुर निवासी शुभम गौतम और जौनपुर निवासी अजय वर्मा समेत अन्य परीक्षार्थियों ने विवेक मौर्य की पहल की सराहना की। उनका कहना था कि नारायण फाउंडेशन की व्यवस्था के चलते उन्हें ठहरने, खाने और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चिंता नहीं करनी पड़ी। साफ-सुथरी व्यवस्था, अच्छा भोजन और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल ने परीक्षा से पहले उनका तनाव काफी कम कर दिया।
अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा के दौरान होटल और परिवहन की व्यवस्था करना अक्सर बड़ी चुनौती बन जाता है, लेकिन अम्बेडकरनगर में उन्हें जिस तरह की निःशुल्क सुविधा मिली, वह उनके लिए बड़ी राहत रही। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल से न केवल परीक्षार्थियों को सहारा मिलता है, बल्कि अम्बेडकरनगर की सकारात्मक छवि भी पूरे प्रदेश में बनती है।
विवेक मौर्य बोले—ये बच्चे उत्तर प्रदेश का भविष्य हैं
नारायण फाउंडेशन के संरक्षक विवेक मौर्य ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवा किसी एक जिले के नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षार्थी तनावमुक्त होकर परीक्षा देंगे तो उनके माता-पिता के सपने पूरे होंगे और जिले का सम्मान भी बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, “यह सेवा नहीं, हमारा कर्तव्य है। जब ये युवा परीक्षा हॉल में बैठेंगे तो उनके मन में व्यवस्थाओं की चिंता नहीं, बल्कि अम्बेडकरनगर से मिले प्यार और अपनेपन की भावना होनी चाहिए।”
वर्षों से परीक्षार्थियों की मदद कर रहा फाउंडेशन
नारायण फाउंडेशन का दावा है कि अम्बेडकरनगर में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का केंद्र पड़ने पर बाहरी जिलों से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए संस्था पिछले कई वर्षों से निःशुल्क ठहरने, भोजन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था करती आ रही है। संस्था का कहना है कि इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान होने वाली अतिरिक्त परेशानियों से राहत देना है।
98 जरूरतमंद बेटियों का कराया विवाह, 25 हजार जूट बैग बांटने का अभियान
छात्र हित के साथ-साथ नारायण फाउंडेशन सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न अभियानों में भी सक्रिय है। फाउंडेशन के अनुसार विवेक मौर्य अपने निजी प्रयासों से अब तक 98 जरूरतमंद बहन-बेटियों का विवाह पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ करा चुके हैं।
इसके अलावा प्लास्टिक मुक्त अम्बेडकरनगर अभियान के तहत जिलेभर में 25 हजार जूट बैग वितरित किए जा रहे हैं। भीषण गर्मी के दौरान सड़क किनारे फल-सब्जी विक्रेताओं, मोचियों और अन्य जरूरतमंद लोगों को धूप व बारिश से बचाने के लिए 5 हजार बड़े छातों का वितरण भी किया गया।
नारायण फाउंडेशन का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों को पठन सामग्री उपलब्ध कराने, गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग करने, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने जैसे सामाजिक कार्य आगे भी जारी रहेंगे।
