लखनऊ :
पेटीएम अपडेट के नाम पर दुकानदार और UPI के नाम पर बुजुर्ग से लाखों की साइबर ठगी,दोनो से कुल 2.83 लाख की धोखाधड़ी।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाज लगातार लोगों को नए-नए तरीकों एवं पैतरे से निशाना बना रहे हैं। थाना बंथरा और कृष्णानगर क्षेत्र में साइबर ठगों ने दो अलग-अलग घटनाओं में ऑनलाइन धोखाधड़ी कर दो लोगों के बैंक खातों से कुल ₹2.83 लाख पार कर दिए। पीड़ितों को बैंक खाते से धन निकासी की जानकारी बाद में हुई, जिसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं स्थानीय थानों में शिकायत दर्ज कराते हुए मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुट गई है।
विस्तार :
पेटीएम अपडेट करने के बहाने दुकानदार से ₹93 हजार की ठगी।
बंथरा थाना क्षेत्र के ग्राम अम्बरपुर निवासी गुड्डू ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह पंजाब नेशनल बैंक की बंथरा शाखा में संचालित अपने खाते से पेटीएम क्यूआर कोड के माध्यम से दुकान पर लेनदेन करता है। आरोप है कि 7 मई 2026 को दोपहर करीब एक बजे एक अज्ञात व्यक्ति उसकी दुकान पर पहुंचा और पेटीएम अपडेट करने की बात कहकर उसका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। दुकानदार के ग्राहकों में व्यस्त रहने का फायदा उठाकर आरोपी ने ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए दो किश्तों में उसके खाते से ₹93,000 निकाल लिए। इसके बाद मोबाइल वापस कर यह कहकर चला गया कि पेटीएम अपडेट हो गया है।
पीड़ित को ठगी की जानकारी 13 मई 2026 को बैंक में पासबुक एंट्री कराने पर हुई। इसके बाद उसने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जहां उसे स्थानीय थाने भेज दिया गया। पीड़ित की तहरीर पर थाना बंथारा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
UPI के जरिए खाते से उड़ाए ₹1.90 लाख।
वहीं थाना कृष्णानगर क्षेत्र के भगवती विहार इन्द्रलोक निवासी कृष्ण लाल अरोड़ा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके बैंक ऑफ बड़ौदा, कृष्णानगर शाखा स्थित खाते से 17 और 18 जुलाई 2026 को ₹95-95 हजार, कुल ₹1.90 लाख की अनधिकृत UPI ट्रांजैक्शन कर ली गई। पीड़ित का कहना है कि यह लेनदेन उसकी जानकारी और अनुमति के बिना अज्ञात साइबर ठगों द्वारा किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैंक को सूचना देकर अपना खाता अस्थायी रूप से ब्लॉक कराया तथा स्थानीय थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस मामले में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों और बैंकिंग ट्रांजैक्शन का विवरण खंगाल रही है।
पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों में साइबर अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपना मोबाइल, ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या डिजिटल भुगतान ऐप की पहुंच न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में दें।
