मऊ :
लाइक-व्यूज की अंधी दौड़ में मौत से खेल रहे किशोर,ऊंचे पुल से नदी में छलांग का वीडियो वायरल।
।।देवेन्द्र कुमार कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जनपद तमसा सोशल मीडिया पर कुछ पल की लोकप्रियता हासिल करने की होड़ अब खतरनाक रूप लेती जा रही है। रील, लाइक और व्यूज के लिए जान जोखिम में डालने की बढ़ती प्रवृत्ति ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
विस्तार :
ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद का है, जहां कुछ किशोरों का ऊंचे पुल से उफनती नदी में छलांग लगाते हुए बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में 15 से 16 वर्ष आयु के कुछ किशोर पुल की रेलिंग पर चढ़कर नदी में छलांग लगाते दिखाई दे रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह जोखिम भरा स्टंट सोशल मीडिया पर रील बनाकर अधिक लाइक और व्यूज पाने के उद्देश्य से किया गया। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसके सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है। संबंधित थाना पुलिस वायरल फुटेज के आधार पर वीडियो में दिखाई दे रहे किशोरों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने इस तरह के मामलों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने में मीडिया की भूमिका की भी सराहना की है।
पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें। कुछ सेकंड की रील किसी की जिंदगी से अधिक मूल्यवान नहीं हो सकती। वहीं अभिभावकों से भी आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुष्प्रभावों तथा ऐसे खतरनाक स्टंट के परिणामों के बारे में जागरूक करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे पुल से नदी में छलांग लगाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। नदी की गहराई, तेज बहाव, पानी के भीतर मौजूद चट्टानें या अन्य अवरोध गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में सिर, रीढ़ और शरीर के अन्य अंगों में गंभीर चोट आने के साथ-साथ डूबने का भी खतरा रहता है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह संकेत दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत कई किशोरों को खतरनाक रास्ते की ओर धकेल रही है। प्रशासन का कहना है कि इस प्रवृत्ति पर समय रहते रोक लगाना जरूरी है, ताकि कोई परिवार महज एक वीडियो या रील की कीमत अपनी संतान की जिंदगी से न चुकाए।
दो टूक:
सोशल मीडिया पर कुछ मिनट की प्रसिद्धि जीवनभर की खुशियों का विकल्प नहीं हो सकती। युवाओं को समझना होगा कि असली पहचान प्रतिभा, मेहनत और सकारात्मक कार्यों से बनती है, न कि जानलेवा स्टंट से। अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को इस खतरनाक डिजिटल प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए जागरूक करें।
