शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

मऊ : लोकसभा विशेषाधिकार समिति का बड़ा कदम: सांसद राजीव राय की शिकायत पर एसपी, SHO और ईएनटी सर्जन तलब।||Mau: Lok Sabha Privileges Committee takes major action: summons Mau's then SP, SHO, and ENT surgeon on MP Rajiv Rai's complaint.||

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मऊ : 
लोकसभा विशेषाधिकार समिति का बड़ा कदम: सांसद राजीव राय की शिकायत पर एसपी,SHO और ईएनटी सर्जन तलब।
।।देवेन्द्र कुमार।।
दो टूक : मऊ घोसी सांसद राजीव राय की शिकायत पर लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए मऊ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (वर्तमान एसएसपी, एटा) इलामरन, सरायलखंसी के तत्कालीन थाना प्रभारी राज कुमार सिंह तथा जिला अस्पताल मऊ के ईएनटी सर्जन डॉ. सौरभ त्रिपाठी को व्यक्तिगत रूप से समिति के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। लोकसभा सचिवालय द्वारा 23 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार तीनों अधिकारियों को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी एक्सटेंशन के समिति कक्ष संख्या-2 में मौखिक साक्ष्य (Oral Evidence) प्रस्तुत करने के लिए तलब किया गया है।
सांसद राजीव राय ने 22 अक्टूबर 2024 को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनके विरुद्ध बिना किसी वैधानिक आधार के एफआईआर दर्ज कराई गई तथा संबंधित अधिकारियों ने उनके साथ पक्षपातपूर्ण, अपमानजनक और संसदीय गरिमा के प्रतिकूल व्यवहार किया। उन्होंने इसे सांसद के विशेषाधिकारों का गंभीर हनन बताते हुए समिति से कार्रवाई की मांग की थी।
मामले में संबंधित अधिकारियों ने समिति के समक्ष अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया था, लेकिन समिति ने उसे पर्याप्त नहीं माना। इसके बाद समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक समझी और उन्हें मौखिक साक्ष्य देने के लिए नोटिस जारी किया।
लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भी निर्देशित किया है कि संबंधित अधिकारियों की निर्धारित तिथि पर समिति के समक्ष उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। साथ ही 31 जुलाई 2026 तक उनकी उपस्थिति की पुष्टि लोकसभा सचिवालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्यालय ज्ञापन की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), संबंधित अधिकारियों तथा सांसद राजीव राय को भी भेजी गई है।
लोकसभा विशेषाधिकार समिति द्वारा अधिकारियों के लिखित स्पष्टीकरण को स्वीकार न करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। अब 5 अगस्त को होने वाली सुनवाई और मौखिक साक्ष्य के आधार पर समिति आगे की संसदीय कार्यवाही तय करेगी।