लखनऊ :
डेढ़ करोड़ की कथित धोखाधड़ी में ढाई माह बाद भी जांच अधूरी,पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।
●एडीसीपी के निर्देश के बावजूद रिपोर्ट लंबित, पीड़ित बोले— न्याय मिलने में हो रही देरी।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि एडीसीपी दक्षिणी रल्लापल्ली वसंथ कुमार के स्पष्ट निर्देश के बावजूद ढाई महीने बीत जाने पर भी जांच रिपोर्ट आगे नहीं बढ़ सकी है, जिससे पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।
मामले में जब एसीपी आर. के. सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने केवल इतना कहा कि "जांच चल रही है।" वहीं, पीड़ितों का आरोप है कि मोहनलालगंज एसीपी कार्यालय की सुस्ती और लापरवाही के कारण जालसाज दम्पत्ति के विरुद्ध कार्रवाई अधर में लटकी हुई है।
विस्तार :
शिकायतकर्ताओं अनिल कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार सिंह और सुनीता सिंह (निवासी सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ) ने संयुक्त रूप से 4 मई को एडीसीपी दक्षिणी को शिकायती पत्र सौंपकर बताया था कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात ओम प्रकाश पांडे और उनकी पत्नी सुधा पांडे से हुई थी। दम्पत्ति एल्डिको सौभाग्यम, वृंदावन योजना, लखनऊ में रहते थे तथा मोहनलालगंज ब्लॉक कार्यालय के पास जियावदी टावर में ओम ऑटोमोबाइल्स और ओम गिरजापति ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से महिंद्रा ट्रैक्टर एवं पार्ट्स की एजेंसी संचालित करते थे।
पीड़ितों का आरोप है कि दम्पत्ति ने उन्हें फर्म में पार्टनर बनाकर अधिक मुनाफा दिलाने का झांसा दिया, जिसके बाद उन्होंने करीब डेढ़ करोड़ रुपये फर्म के खाते में निवेश कर दिए। शुरुआती दौर में कुछ मुनाफा मिला, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपित लगातार टालमटोल करते रहे।
शिकायत के अनुसार, 25 फरवरी 2026 को ओम प्रकाश पांडे और उनकी पत्नी मोहनलालगंज स्थित कार्यालय से सामान समेटकर फरार हो गए तथा वृंदावन योजना स्थित किराये का मकान भी खाली कर दिया। बाद में जब पीड़ित सिद्धार्थनगर स्थित उनकी ससुराल पहुंचे तो उन्हें जानकारी मिली कि आरोपित पहले भी एक धोखाधड़ी के मामले में जेल जा चुका है।
पीड़ितों का कहना है कि एडीसीपी दक्षिणी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन एसीपी को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने एसीपी कार्यालय में अपने बयान दर्ज कराए और सभी आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए, लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट एडीसीपी कार्यालय नहीं भेजी गई। इससे आरोपित दम्पत्ति के विरुद्ध आगे की कार्रवाई पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
पीड़ितों ने मामले में शीघ्र निष्पक्ष जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
