बुधवार, 22 जुलाई 2026

लखनऊ :बारिश ने खोली सड़क निर्माण की पोल, गड्ढों में तब्दील मदाखेड़ा–सिसेंडी मार्ग,हर सफर बन रहा खतरे का सफर।||Lucknow:Rain has exposed the poor road construction, leaving the Madakheda-Sisendi road in a state of potholes, making every journey a dangerous one.||

शेयर करें:
लखनऊ :
बारिश ने खोली सड़क निर्माण की पोल, गड्ढों में तब्दील मदाखेड़ा–सिसेंडी मार्ग,हर सफर बन रहा खतरे का सफर।
हजारों लोगों का रोजाना आवागमन प्रभावित, पानी से भरे गड्ढों में फंसकर गिर रहे वाहन चालक, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने मदाखेड़ा–सिसेंडी मार्ग के सड़क निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों और उनमें भरे बारिश के पानी के कारण यह मार्ग राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। प्रतिदिन हजारों लोगों के आवागमन वाले इस प्रमुख संपर्क मार्ग पर दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल मरम्मत न होने पर जन आंदोलन की चेतावनी दी है।
विस्तार :
मोहनलालगंज क्षेत्र का मदाखेड़ा–सिसेंडी मार्ग कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से प्रतिदिन छात्र, किसान, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और मरीज अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। लगातार बारिश के चलते सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर पानी भरे होने के कारण वाहन अचानक गड्ढों में उतर जाते हैं और दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीण राजीव त्रिवेदी, मुकेश गुप्ता और जगदीश द्विवेदी ने बताया कि सड़क लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रही है। बरसात ने इसकी हालत और बदतर कर दी है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। उनका कहना है कि यह लापरवाही आम जनता की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से तत्काल सड़क की मरम्मत कर गड्ढों को भरने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही मार्ग को दुरुस्त नहीं कराया गया तो क्षेत्रवासी जनहित में आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।