लखनऊ:
जवाहर भवन अग्निकांड के बाद कर्मचारियों में दहशत, दोषियों पर कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की कर्मचारियों की मांग।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के हजरतगंज मे स्थित जवाहर भवन के चौथे तल पर सोमवार सुबह लगी भीषण आग के बाद कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। इस घटना को लेकर जवाहर भवन/इंदिरा भवन कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों ने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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जवाहर भवन/इंदिरा भवन कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के
एसोसिएशन की अध्यक्ष मीना सिंह ने कहा कि जवाहर भवन और इंदिरा भवन में प्रतिदिन लगभग 5 से 7 हजार अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत रहते हैं। इसके अलावा विभिन्न आयोगों में बड़ी संख्या में फरियादी और अधिवक्ता भी आते हैं। ऐसे में आग की घटना ने सभी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
एसोसिएशन का आरोप है कि आग लगने के दौरान भवन का छज्जा टूटकर गिर गया, जिससे भवन की जर्जर स्थिति उजागर हुई। साथ ही चौथे तल पर खाद्य एवं रसद विभाग के लिए लगभग 40 लाख रुपये की लागत से कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य और वहां लगाए गए विंडो एसी की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि आग लगने के समय फायर फाइटिंग सिस्टम प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर सका, जिसके चलते कर्मचारियों को समय पर सूचना नहीं मिल सकी। घटना की जानकारी सुरक्षा गार्डों और कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा फायर विभाग को दी गई। कई दमकल वाहन मौके पर पहुंचे, लेकिन हाइड्रोलिक लिफ्ट नहीं होने के कारण ऊंचाई पर लगी आग बुझाने में काफी समय लग गया।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि दोनों भवनों की सीढ़ियों और गलियारों में निष्प्रयोज्य सामग्री तथा परिसर में खड़े बेकार वाहनों के कारण आपातकालीन स्थिति में आवागमन बाधित होता है। ऐसे सामान और वाहनों को तत्काल हटाने की मांग की गई है ताकि भविष्य में किसी भी दुर्घटना के दौरान राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित न हो।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग के कुछ अधिकारियों पर वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात रहने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण एवं पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की गई है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि अग्निकांड के दोषी अधिकारियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और भवनों से निष्प्रयोज्य सामग्री व वाहन नहीं हटाए गए, तो कर्मचारी संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
